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7 Jul 2020

Hindi kahaniya - 5 Motivational Stories in Hindi for students

हिंदी कहानियां [Hindi kahaniya]
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सुख और दुःख तो सभी के जीवन में आते है लेकिन ये हम पर निर्भर करता है की हम उन्हें कैसे देखते है और उनका हल कैसे ढूंढते है. जीवन में कभी हार नहीं मानने के लिए हमेशा motivated रहने की जरुरत होती है. आज की इस पोस्ट में हम इसी मोटिवेशन के बारे 5 Motivational Stories in Hindi For Students आपके साथ शेयर कर रहें है. इन कहानियों से न केवल मोटिवेशन मिलेगा बल्कि आपको इन कहानियों से कई सीख यानी मोरल एजुकेशन भी मिलेगी. अगर आपको ये कहानियाँ पसंद आये तो कृपया करके इस पोस्ट को फेसबुक, whatsapp और instagram पर शेयर जरुर कीजियेगा और ऐसी ही और अच्छी और प्रेरणादायक कहानियों के लिए जुड़े रहिये इंस्पायर्ड हिंदी ब्लॉग से.

तो आईये पढ़ते है...



1. परमात्मा और किसान - Motivational Story

एक बार एक किसान परमात्मा से बड़ा नाराज हो गया! कभी बाढ़ आ जाये, कभी सूखा पड़ जाए, कभी धूप बहुत तेज हो जाए तो कभी ओले पड़ जाये! हर बार कुछ ना कुछ कारण से उसकी फसल थोड़ी ख़राब हो जा रही थी|


एक दिन बड़ा तंग आ कर उसने परमात्मा से कहा- देखिये प्रभु, आप परमात्मा हैं, लेकिन लगता है आपको खेती-बाड़ी की ज्यादा जानकारी नहीं है, एक प्रार्थना है कि एक साल मुझे मौका दीजिये, जैसा मै चाहू वैसा मौसम हो, फिर आप देखना मै कैसे अन्न के भण्डार भर दूंगा! परमात्मा मुस्कुराये और कहा ठीक है, जैसा तुम कहोगे वैसा ही मौसम दूंगा, मै दखल नहीं करूँगा!


किसान ने गेहूं की फ़सल बोई, जब धूप चाही, तब धूप मिली, जब पानी तब पानी! तेज धूप, ओले, बाढ़, आंधी तो उसने आने ही नहीं दी, समय के साथ फसल बढ़ी हो गई और किसान की ख़ुशी भी क्योंकि ऐसी फसल तो आज तक नहीं हुई थी!  किसान ने मन ही मन सोचा अब पता चलेगा परमात्मा को, की फ़सल कैसे करते हैं, बेकार ही इतने बरस हम किसानो को परेशान करते रहे|


फ़सल काटने का समय भी आया, किसान बड़े गर्व से फ़सल काटने गया, लेकिन जैसे ही फसल काटने लगा, एकदम से छाती पर हाथ रख कर बैठ गया! गेहूं की एक भी बाली के अन्दर गेहूं नहीं था ,सारी बालियाँ अन्दर से खाली थी,


बड़ा दुखी होकर उसने परमात्मा से कहा- प्रभु ये क्या हुआ?


तब परमात्मा बोले-ये तो होना ही था, तुमने पौधों को संघर्ष का ज़रा सा भी मौका नहीं दिया.


ना तेज धूप में उनको तपने दिया, ना आंधी ओलों से जूझने दिया, उनको किसी प्रकार की चुनौती का अहसास जरा भी नहीं होने दिया| इसीलिए सब पौधे खोखले रह गए, जब आंधी आती है, तेज बारिश होती है ओले गिरते हैं तब पोधा अपने बल से ही खड़ा रहता है, वो अपना अस्तित्व बचाने का संघर्ष करता है और इस संघर्ष से जो बल पैदा होता है वोही उसे शक्ति देता है, उर्जा देता है, उसकी जीवटता को उभारता है|


सोने को भी कुंदन बनने के लिए आग में तपने, हथौड़ी से पिटने, गलने जैसी चुनोतियो से गुजरना पड़ता है तभी उसकी स्वर्णिम आभा उभरती है और उसे अनमोल बनाती है!


उसी तरह जिंदगी में भी अगर संघर्ष ना हो, चुनौती ना हो तो आदमी खोखला ही रह जाता है, उसके अन्दर कोई गुण नहीं आ पाता!


ये चुनोतियाँ ही हैं जो आदमी रूपी तलवार को धार देती हैं, उसे शक्त और प्रखर बनाती हैं| अगर प्रतिभाशाली बनना है तो चुनोतियाँ स्वीकार करनी ही पड़ेंगी, अन्यथा हम खोखले ही रह जायेंगे. अगर जिंदगी में प्रखर बनना है ,प्रतिभाशाली बनना है ,तो संघर्ष और चुनोतियो का सामना तो करना ही पड़ेगा!

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2. आलू, अंडा और कॉफ़ी बीन्स - motivational stories 


एक दिन एक छोटी सी लड़की अपने पिता को दुख व्यक्त करते-करते अपने जीवन को कोसते हुए यह बता रही थी कि उसका जीवन बहुत ही मुश्किल दौर से गुज़र रहा है । साथ ही उसके जीवन में एक दुख का समय जाता है तो दूसरा चला आ रहा है और वह इन मुश्किलों से लड़ लड़ कर अब थक चुकी है । वह करे तो क्या करे !


उसके पिता प्रोफेशन से एक शाहकार (Chef) थे । अपनी बेटी के इन शब्दों को सुनने के बाद वह अपनी बेटी को रसोईघर लेगया और 3 कढाई में पानी डाल कर तेज आग पर रख दिया । जैसे ही पानी गरम हो कर उबलने लगे, पिता नें एक कढाई एक आलू डाला, दुसरे में एक अंडा और तीसरे में कुछ कॉफ़ी बीन्स दल दिए ।


वह लड़की बिना कोई प्रश्न किये अपने पिता के इस काम को ध्यान से देख रही थी ।


कुछ 15-20 मिनट के बाद उन्होंने आग बंद कर दिया और एक कटोरे में आलू को रखा, दुसरे में अंडे और कॉफ़ी बीन्स वाले पानी को कप में । पिता ने बेटी की तरफ उन तीनों कटोरों दिखाते हुए एक साथ कहा ! आलू, अंडे, और कॉफ़ी बीन्स ।


पिता ने दुबारा बताते हुए बेटी से कहा !


पास से देखो इन तीनों चीजों को –


बेटी ने आलू को देखा जो उबलने के कारण मुलायम हो गया था । उसके बाद अंडा को देखा जो उबलने के बाद अन्दर से कठिन हो गया था । और आखरी में जब कॉफ़ी बीन्स को देखा तो उस पानी से बहुत ही अच्छी खुशबु आरही थी।


पिता ने बेटी से पुछा-क्या तुमको पता चला इसका मतलब क्या है ?


तब उसके पिता ने समझाते हुए कहा इन तीनो चीजों ने अलग अलग तरीके से प्रतिक्रिया किया परन्तु जो मुश्किल उन्होंने झेला वह समान था।


साथ ही उसने अपनी बेटी से प्रश्न किया-जब विपरीत परिस्तिथि तुम्हारे जीवन में आते हैं तो तुम क्या बनना चाहोगे आलू, अंडा या कॉफ़ी बीन्स।


शिक्षा/Moral:- इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि जीवन में परिस्तिथि चाहें जितने भी बड़े हो वह उस मनुष्य के ऊपर है कि वह कितना झेल सकता है।

3. ज़िन्दगी के पत्थर, कंकड़ और रेत - Hindi Story with Moral

Philosophy के एक Professor ने कुछ चीजों के साथ Class में प्रवेश किया.

जब Class शुरू हुई तो उन्होंने एक बड़ा सा खाली शीशे का जार लिया और उसमे पत्थर के बड़े-बड़े टुकड़े भरने लगे.

Professor ने फिर Students से पूछा- कि क्या जार भर गया है? और सभी ने कहा “हाँ.

तब प्रोफ़ेसर ने छोटे-छोटे कंकडों से भरा एक Box लिया और उन्हें जार में भरने लगे.

जार को थोडा हिलाने पर ये कंकड़ पत्थरों के बीच settle हो गए.

एक बार फिर प्रोफ़ेसर ने छात्रों से पूछा कि- क्या जार भर गया है? और सभी ने हाँ में उत्तर दिया.

तभी Professor ने एक Sand Box निकाला और उसमे भरी रेत को जार में डालने लगे. रेत ने बची-खुची जगह भी भर दी और एक बार फिर उन्होंने पूछा कि क्या जार भर गया है? और सभी ने एक साथ उत्तर दिया, ” हाँ”

फिर Professor ने समझाना शुरू किया-” मैं चाहता हूँ कि आप इस बात को समझें कि ये जार आपकी Life को Represent करता है.

बड़े-बड़े पत्थर आपके जीवन की ज़रूरी चीजें हैं- आपकी Family, आपका Partner, आपकी Health आदि| अगर आपकी बाकी सारी चीजें खो भी जाएँ और सिर्फ ये रहे तो भी आपकी ज़िन्दगी पूर्ण रहेगी.

ये कंकड़ कुछ अन्य चीजें हैं जो Matter करती हैं- जैसे कि आपकी Job, आपका घर, इत्यादि. और ये रेत बाकी सभी छोटी-मोटी चीजों को दर्शाती है.

शिक्षा/Moral:- अगर आप जार को पहले रेत से भर देंगे तो कंकडों और पत्थरों के लिए कोई जगह नहीं बचेगी. यही आपकी life के साथ होता है. अगर आप अपनी सारा समय और उर्जा छोटी-छोटी चीजों में लगा देंगे तो आपके पास कभी उन चीजों के लिए समय नहीं होगा जो आपके लिए महत्त्वपूर्ण हैं. उन चीजों पर ध्यान दीजिये जो आपकी खुशियों के लिए ज़रूरी हैं.
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4. क्रोध पर विजय - Motivational Story in Hindi

बहुत प्राचीन बात है। किसी गाँव में एक बुर्जुग महात्मा रहते थे। दूर-दूर से लोग शिक्षा गृहण करने के उद्देश्य से अपने बच्चों को उनके आश्रम में भेजते थे। एक दिन महात्मा जी के पास कमल नाम का एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति आया।

‘गुरु जी मुझे अपने श्रीचरणों में जगह दे दीजिए। अब मेरी कोई कामना बाकी नहीं रही है। मैं आश्रम में रहकर आपके आज्ञानुसार समाज को अभी तक प्राप्त किया हुआ ज्ञान वितरित करना चाहता हूँ।‘ पारखी वृद्ध महात्मा ने एकदम समझ लिया कि यह व्यक्ति काबिल है, इसकी कामना सच्ची है और यह समाज के प्रति अपने दायित्व को निभाने के लिए कृतसंकल्पित है।

कमल उनके चरणों में गिरकर प्रार्थना किये जा रहा था-गुरु जी! मुझे अपने श्रीचरणों में स्थान दें।

महात्मा जी ने कहा-‘पुत्र! आश्रम की परम्परा है कि तुम स्नान करके पवित्र हो और भगवान के आगे संकल्प धारण करो कि अपना कृतव्य सही तरीके से निभाओगे। अतः इस कार्य के लिए तुम कल प्रातः स्नान करके आश्रम आ जाना।’

उसके जाते ही वृद्ध महात्मा जी ने साफ-सफाई का कार्य करने वाली महिला को अपने पास बुलाया और कहा ‘कल सुबह यह नया शिक्षक आयेगा। जैसे ही यह आश्रम के नजदीक आये, तुम इस प्रकार से झाड़ू लगाना कि उसके चेहरे पर धूल गिर जाए। लेकिन यह कार्य थोड़ा सावधानी से करना। वह तुम पर हाथ भी छोड़ सकता है। महिला महात्मा जी की बहुत सम्मान करती थी। उसने उनकी आज्ञा को सहर्ष स्वीकार कर लिया।

अति प्रसन्न मुद्रा में कमल नहा-धोकर इठलाता हुआ आश्रम आने लगा। जैसे ही वह नजदीक पहुँचा, महिला ने तेजी से झाड़ू लगाना शुरू कर दिया। कमल के पूरे चेहरे में धूल चली गई। उसके क्रोध की सीमा न रही। पास पड़े पत्थर को उठाकर वह महिला को मारने के लिए दौड़ा। महिला पहले ही सावधान थी। वह झाड़ू फैंक-फांक के वहाँ से भाग खड़ी हुई। अधेड़ के मुख में जो आया बकता चला गया।

कमल वापिस घर गया और दुबारा स्नान करके महात्मा के पास लौटा।

महात्मा जी ने कहा-‘अभी तो तुम जानवरों के समान लडने के लिए दौड़ते-चिल्लाते हो। तुमसे अभी यहाँ शिक्षण कार्य नहीं होगा। तुम एक वर्ष के बाद आना तब तक जो कार्य करते हो वही करते रहो।’

कमल की इच्छा सच्ची थी। उसकी महात्मा में श्रद्धा भी सच्ची थी। वर्ष पूरा होते ही वह फिर महात्मा जी के समीप उपस्थित हुआ।

महात्मा जी ने आदेश दिया- ‘पुत्र तुम कल स्नान करके प्रातः आना।’

कमल के जाते ही महात्मा जी ने सफाई कर्मचारी को बुला कर कहा-‘वह फिर आ रहा है। इस बार मार्ग में झाड़ू इस तरह से लगाना कि धूल के साथ-साथ उस पर झाड़ू की हल्की सी चोट भी लग जाए। डरना मत, वह तुम्हें मारेगा नहीं। कुछ भी बोले तो चुपचाप सुनते रहना।’

अगले दिन स्नान-ध्यान करके वह व्यक्ति जैसे ही द्वार तक पहुंचा। महिला झाड़ू लगाते हुए पहुंच गयी। महिला ने आदेशानुसार जानबूझकर झाड़ू उस पर इस प्रकार से छुआ कि कपड़े भी गंदे हो गये।

कमल को बहुत क्रोध आया, पर झगड़ने की बात उसके मन में नहीं आयी। वह केवल महिला को गालियाँ बक कर फिर स्नान करने घर लौट गया।

जब वह महात्मा जी के पास वापिस पहुंचा, संत ने कहा-‘तुम्हारी काबिलियत में मुझे संदेह है। एक वर्ष के बाद यहाँ आना।’

एक वर्ष और बीत गया। कमल महात्मा जी के पास आया। उसे पूर्व के भांति स्नान-ध्यान करके आने की आज्ञा मिली।

महात्मा जी ने उसके जाते ही उसी महिला को फिर बुलाया- ‘इस बार सुबह जब वह आये तो तुम इस बार अपनी कचड़े की टोकरी उस पर उड़ेल देना।’

साफ-सफाई करने वाली महिला डर गयी।

महिला ने कहा- ‘वह तो अति कठोर स्वभाव का है। ऐसा करने पर तो वह अत्यंत क्रोधित होगा और मार-पीट पर उतर जायेगा।’

महात्मा जी ने उसे आश्वासन दिया-‘चिन्ता मत करो। इस बार वह कुछ नहीं कहेगा। इसलिए तुम्हें भागने की आवश्यकता नहीं है।’

सुबह जैसे ही कमल आश्रम पहुँचा। महिला ने अनजान बनकर पूरा कूड़ा-कचरा उस पर उड़ेल दिया।

पर यह क्या! इस बार न तो वह गुस्सा हुआ और न ही मार-पीट के लिए दौड़ा।

कमल ने कहा- ‘माता! आप मेरी गुरु हैं। ’

कमल ने महिला के सामने अपना मस्तक झुका कर कहा... ‘आपने मुझ मूर्ख-अभिमानी पर अति कृपा की है।

आपके सहयोग से मैंने अपने बड़प्पन के अहंकार और क्रोध-रूपी शत्रु पर विजय प्राप्त की है।

वह दुबारा घर गया। स्नान करके आश्रम में उपस्थित हुआ।

इस बार महात्मा जी ने उसे गले लगा लिया और बोले- ‘पुत्र! तुमने अपने क्रोध पर काबू पा लिया है अतः अब तुम आश्रम में कार्य करने के सच्चे अधिकारी हो।



5. हर व्यक्ति के जीवन की एक कहानी है - Moral Story in Hindi

एक बार एक 26 साल का लड़का और उसका पिता रेलगाड़ी (Train) में सफ़र कर रहे थे।

वह लड़का बार-बार train की खिड़की से झाँक रहा था और बहार दिखते हुए पेड़ पौधों को देखकर जोर-जोर से चिल्ला रहा था और हंस रहा था ।

पास ही में एक शादी-शुदा जोड़ा बैठे थे वह यह सब देखकर हंस रहे थे।

तभी उस 26 साल के लड़के के पिता ने अपने बेटे से कहा- देखो बेटा… बाहर असमान में बादलों को देखो वह भी हमारे साथ दौड़ लगा रहे हैं।

यह पागलपना देखकर उस शादी-शुदा जोड़े को सहन नहीं हुआ और वह उस लड़के के पिता से बोल बैठे!

शादी-शुदा जोड़े बोले- आप अपने बेटे को किसी डॉक्टर को क्यों नहीं दिखाते?

यह सुनकर उस लड़के के पिता ने उत्तर दिया!- हाँ , हम डॉक्टर के पास से ही आ रहे हैं।

दरसल मेरा बेटा देख नहीं सकता था पर आज उसके आँखों के सफल ऑपरेशन के कारण वह देख पा रहा है और आज वह बहुत खुश है।

इस पुरे पृथ्वी में हर किसी व्यक्ति के जीवन में एक कहानी है।

शिक्षा/Moral:- हमें इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि किसी भी व्यक्ति के विषय में पूरी जानकारी न होने पर उसके विषय में टिपण्णी करना बिलकुल गलत बात है।

आपको ये कहानियाँ कैसी लगी? हमे कमेंट करके जरुर बताये और इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करें.

सुख और दुःख तो सभी के जीवन में आते है लेकिन ये हम पर निर्भर करता है की हम उन्हें कैसे देखते है और उनका हल कैसे ढूंढते है. जीवन में कभी हार नहीं मानने के लिए हमेशा motivated रहने की जरुरत होती है motivated रहने के लिये kahaniya.xyz से जूडे रहे।

धन्यवाद दोस्तों 🥰

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