हिंदी कहानियां

In this site you will find the hindi kahaniya like hindi motivatinal kahaniya for students, some real life motivaltional stories in hindi,love stories in hindi,horror stories in hindi,motivational shayaris in hindi this site is all about hindi materials

Breaking

3 Dec 2020

December 03, 2020

कठिनाइयों से ना घबराएं- Motivational Hindi story for school and college students

 कठिनाइयों से ना घबराएं- 


बहुत समय पहले की बात है एक शिल्पकार एक मूर्ति बनाने के लिए किसी जंगल में पत्थर ढूंढने के लिए गया। वहां उसे मूर्ति बनाने के लिए एक बहुत अच्छा पत्थर मिल गया।

वो पत्थर लेके वापस घर आते वक्त रास्ते में से एक ओर पत्थर साथ उठा लाया। घर आकर उसने अच्छे वाले पत्थर को मूर्ति बनाने के लिए हथौड़ी और छेनी से उस पत्थर पर कारीगरी करने लगा।

जब शिल्पकार की छेनी और हथौड़ी से पत्थर को चोट लगने लगी तो पत्थर ने दर्द से कराहते हुए शिल्पकार से बोला, “अरे भाई मेरे से यह दर्द सहा नहीं जाता, ऐसे तो मैं बिखर जाऊंगा। तुम किसी और पत्थर की मूर्ति बना दो ना प्लीज़।”

उस पत्थर की बात सुनकर शिल्पकार को दया आ गई। उसने उस पत्थर को छोड़कर दूसरे पत्थर की गढ़ाई करनी शुरू कर दी। दूसरे पत्थर ने कुछ भी नहीं बोला। शिल्पकार ने थोड़े ही समय में एक प्यारी सी भगवान की मूर्ति बना दी।

पास के गांव के लोग तैयार मूर्ति को लेने के लिए आए। मूर्ति को लेकर निकलने वाले थे लेकिन उन्हें ख्याल आया कि नारियल फोड़ने के लिए भी एक पत्थर की जरूरत होगी तो वहां पर रखा पहले वाला पत्थर भी उन्होंने अपने साथ ले लिया।

मूर्ति को ले जाकर उन्होंने मंदिर में सजा दिया और पहले वाले पत्थर को भी सामने रख दिया।

मंदिर में जब भी कोई व्यक्ति दर्शन करने आते तो मूर्ति पर फूल माला चढ़ाते, दूध से नहलाते और उसकी पूजा करते। और सामने वाले पत्थर पर नारियल फोड़ते हैं।

अब पहले वाले पत्थर को हर रोज दर्द सहना पड़ता था।

उसने मूर्ति वाले पत्थर से कहा,”तुम्हारे तो मजे है। रोज फूल माला से सजते हों, रोज तुम्हारी पूजा होती हैं। मेरी तो साला किस्मत ही खराब हैं। रोज लोग नारियल फोड़ते हैं और मेरे को दर्द सहना पड़ता है।”

पहले वाले पत्थर की बात सुनकर मूर्ति बने पत्थर ने कहा,”देख दोस्त अगर उस दिन तूने शिल्पकार के हाथ का दर्द सहा होता तो आज तुम्हें यह दिन नहीं देखना पड़ता और तुम मेरी जगह पर होते। लेकिन तुमने तो थोड़े से समय के दर्द को ना सहकर आसान वाले रास्ते को चुना। अब तुम उसका नतीजा भुगत रहे हो।


शिक्षा: दोस्तों हमारे जीवन में भी कई कठिनाइयां आती है। बहुत सारा दर्द भी झेलना पड़ता है। लेकिन हमें इनसे डरकर पीछे नहीं हटना है, इनका डटकर मुकाबला करना है। यह विपरीत परिस्थितियां हमें और ज्यादा मजबूत बनाएगी। जिससे हम अपनी मंजिल के और ज्यादा करीब पहुंच जाएंगे।


एक बात और याद रखना मेरे दोस्त-

पतंग हवा के विपरीत दिशा में ही आसमान को छूती है।

तो अब जब भी आपके जीवन में विपरीत परिस्थितियां आए तो समझ लो कि आसमान छूने का वक्त आ गया है। कमर कस लो और डट के सामना करो, खूब कड़ी मेहनत करो और अपनी मंजिल को साकार करो।


उम्मीद है दोस्तो ये कहानी जरूर पसंद आयी होगी।

2 Dec 2020

December 02, 2020

“चपरासी की नौकरी” Motivational Story in Hindi for college Students

हिंदी कहानियां [Hindi kahaniya]

kahaniya.xyz blog provide you hindi motivational stories,hindi kahaniya,hindi motivational quotes,hindi motivational quotes image,hindi kahaniya for kids ,hindi motivational story for children, short motivational Hindi kahaniya

दोस्तो आज मै आप को एक ऐसी कहानी के बारे में बताने जा रह हूं जिस पध कर आप जरूर motivate होगे और जिंदगी में हर ना मानने की एक और कहानी है ये आशा करता हूं आप को पसंद आए 

एक लड़का जो कि करीब 23 साल की उम्र का था, चपरासी की नौकरी के लिए एक बड़ी कंपनी में interview देने गया. उस कंपनी के मालिक ने उसे कहा कि अगर तुमने ये फर्श अच्छे से साफ़ किया तो तुम्हारी नौकरी पक्की। बस फिर क्या था, उस आदमी ने फर्श को एकदम से चमका दिया जिसे देखते ही मालिक ने कहा तुम्हारी नौकरी पक्की, तुम कल से काम पर आ जाना. बॉस ने उस आदमी को बुलाया और कहा कि अपनी एक फोटो, ID प्रूफ और email ID भी बतानी होगी. आदमी ने तुरंत कहा कि मैं तो एक गरीब व्यक्ति हूँ, मेरे पास ना तो कंप्यूटर है और ना ही मैंने कभी Email ID बनायीं है.



Boss ने तुरंत कहा “अरे… हमारी बहुत बड़ी कंपनी है.. हमें हर काम करने वाले व्यक्ति की Email चाहिए होती है और ये अनिवार्य है, आज के युग में अगर तुम्हारी email ID नहीं है तो तुम्हारा कोई अस्तित्व नहीं, हम तुम्हे इस नौकरी पर नहीं रख सकते. वह व्यक्ति बहुत निराश हुआ और वहा से चल दिया. अब उसकी जेब में केवल Rs 500 रुपये थे. उसने फैसला किया कि वह सब्जी बेच कर थोड़े पैसे कमा लेगा. उसने Rs 500 के टमाटर खरीद लिए और उसे जुट बोल कल जैसे कि ये विदेशी टमाटर है कह कर भेचने लगा  2 घंटे में उसके सभी टमाटर बिक गए. उसने फिर से Rs 500 के टमाटर खरीदे और वे फिर बिक गए. इस तरह उसने दिन में 3 बार 500-500 रुपये के टमाटर खरीदे और सारे टमाटर बिक भी जाते. दिन के अंत में उसे काफी मुनाफा हो गया.

घर आ कर उस व्यक्ति ने सोचा कि अगर मैं इसी तरह सब्ज़ी बेचता राहु तो काफी मुनाफा कमा लूंगा. उसने 6 महीने तक यही काम किया और जब उसके पास काफी रुपये इकठ्ठा हो गए तो उसने सब्ज़ी की एक रेढ़ी खरीद ली. अब उसका काम बहुत अच्छा चलने लगा. बहुत जल्द उसने ट्रक से सब्ज़ी बेचनी शुरू कर दी और देखते ही देखते उसने सब्जी बेचने का wholesale काम शुरू कर दिया. अब हर दिन वह 10 से 15 ट्रक में सब्जी deliver करने लगा जिसके लिए उसने कुछ व्यक्तियों को काम पर रखा था. कुछ सालो बाद उस आदमी food retailing में बड़ा नाम कमा लिया।

एक दिन उसने सोचा क्यों न मैं अपनी insurance करवा लू. इसके लिए उसने एक insurance करने वाले को घर पे बुलाया. जब broker उस व्यक्ति की insurance कर रहा था तो उसने उस आदमी का email पुछा तो उसने कहा मेरी email ID नहीं है. Insurance broker ने बड़ी हैरानी से पुछा कि आपका इतना बड़ा business है लेकिन आपका email ID नहीं, ऐसा कैसे हो सकता है. उस ब्रोकर ने कहा “आपको पता है अगर आपका ईमेल होता तो आप आज कहा से कहा होते !”

वह व्यक्ति थोड़ी ख़ामोशी के बाद बोला …” अगर मेरा email होता तो आज मैं एक चपरासी होता”

ये बात उस Insurance Broker को तो समझ नहीं आयी लेकिन आपको शायद अच्छे से समझ आ गयी होगी.


अगर आज आपके साथ कुछ अच्छा नहीं हो रहा है तो निराश मत होईये. ज़िन्दगी में आगे चल कर कई नए रस्ते खुलेंगे, कई मौके मिलेंगे। इसलिए हमेशा कोशिश करते रहिये और मात्र एक हार के बात धैर्य मत खोइए, क्या पता कामयाबी शायद आपकी अगली कोशिश की प्रतीक्षा कर रही हो !



दोस्तों यह motivation story for college student in hindi आपको कैसी लगी, हमें जरूर बताये और आपके पास भी कोई कहानी तो हमें भेजे, जल्दी पब्लिश किया जायेगा।

December 02, 2020

कभी कभी जो दिखाई देता है, वो सच नहीं होता Short Moral story in Hindi for childrens

 कई बार हम अपने जीवन में दूसरों को सही तरीके से समझे बिना उनके बारे में निर्णय ले लेते हैं, और अपने रिश्ते को खराब करने लगते हैं। किसी भी रिश्ते या इंसान को अच्छे से समझने के लिए हमें थोड़ा समय जरूर देना चाहिए। कहते हैं कि किसी भी रिश्ते की डोर तब कमजोर हो जाती है, जब इंसान रिश्ते में उठने वाले सवालों के जवाब खुद ही बनाने लग जाता है। दोस्तों ये Story on Moral Values in Hindi रिश्तों को सही से समझने की यही सीख देती है।



एक बार एक 5 साल की छोटी बच्ची और उसकी मां एक गार्डेन में टहल रहे थे।

बच्ची के हाथों में दो सेब थे। बच्ची की मां ने बच्ची के पास जाकर पूछा, क्या तुम मुझे इन दो सेबों में से एक सेब दोगी।

मां की ये बात सुनकर बच्ची थोड़े देर के लिए शांत हो गई। फिर उसने जल्दी से पहले तो एक सेब का एक टूकड़ा अपने दांतों से काट लिया और फिर दूसरे सेब का एक टूकड़ा भी अपने दांतों से काट लिया।

बच्ची को ऐसा करते देख बच्ची की मां थोड़ी मायूस सी हो गई।


उसे लगा कि उसकी बेटी में शेयर करके खाने की आदत ही नहीं है, जब वो मुझे अपनी चीज नहीं देना चाह रही है तो फिर दूसरों को क्या देगी।

बच्ची की मां मायूस होकर भी मुस्कुरा रही थी, ताकि बच्ची को बूरा ना लगे।

तभी अचानक बच्ची ने उन दो सेबों में से एक सेब अपनी मां की ओर बढ़ाते हुए कहा कि मम्मी, आप ये वाला सेब खाओ, क्योंकि ये ज्यादा मीठा है।

बच्ची की ये बात सुनकर उसकी मां अचम्भे में पड़ गई। वो सोचने लगी कि अभी क्षणभर पहले वो अपनी बेटी के लिए कितना बुरा सोच रही थी, कि उसमें शेयर कर के खाने की आदत ही नहीं है। लेकिन ऐसा नहीं है, उसकी बेटी तो अपनी मां के लिए बहुत ही ज्यादा केयरिंग है। तभी तो उसने खुद खा कर फिर ज्यादा मीठे वाला सेब अपनी मां को खाने के लिए दिया।


दोस्तों, इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है कि अक्सर हम जल्दबाजी में दूसरों के प्रति जैसी अवधारणा बना लेते हैं, वैसा होता नहीं है।

कई बार लोग हमारे सोचने के बिल्कुल विपरीत होते हैं। इसलिए हमें कभी भी जल्दबाजी में आकर किसी के लिए कोई भी धारणा नहीं बनानी चाहिए, क्योंकि कभी- कभी जो दिखाई देता है वो सच्चाई नहीं होती।


अगर ये Story on Moral Values in Hindi आपको अच्छी लगी हो, तो हमें नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताये और इस कहानी को Facebook या Whatsapp पर शेयर करना ना भूले ।

10 Jul 2020

July 10, 2020

hindi kahaniya panchtantra-चतुर खरगोश और शेर-पंचतंत्र||panchtantra ki kahani(पंचतंत्र)


In this artical you will get the all time favourite panchtantra ki kahaniya in hindi, a sories of a brave and smart rabbite and strong and king of the jangal lion stories  in hindi for kids when i was a kid i read panchtantra ki kahaniya in comice booke and i love them ... so i think i will write panchtatra stories in hindi in this blog ...


चतुर खरगोश और शेर-पंचतंत्र


किसी घने वन में एक बहुत बड़ा शेर रहता था। वह रोज शिकार पर निकलता और एक ही नहीं, दो नहीं कई-कई जानवरों का काम तमाम देता। जंगल के जानवर डरने लगे कि अगर शेर इसी तरह शिकार करता रहा तो एक दिन ऐसा आयेगा कि जंगल में कोई भी जानवर नहीं बचेगा।
सारे जंगल में सनसनी फैल गई। शेर को रोकने के लिये कोई न कोई उपाय करना ज़रूरी था। एक दिन जंगल के सारे जानवर इकट्ठा हुए और इस प्रश्न पर विचार करने लगे। अन्त में उन्होंने तय किया कि वे सब शेर के पास जाकर उनसे इस बारे में बात करें। दूसरे दिन जानवरों के एक दल शेर के पास पहुंचा। उनके अपनी ओर आते देख शेर घबरा गया और उसने गरजकर पूछा, ‘‘क्या बात है ? तुम सब यहां क्यों आ रहे हो ?’’
जानवर दल के नेता ने कहा, ‘‘महाराज, हम आपके पास निवेदन करने आये हैं। आप राजा हैं और हम आपकी प्रजा। जब आप शिकार करने निकलते हैं तो बहुत जानवर मार डालते हैं। आप सबको खा भी नहीं पाते। इस तरह से हमारी संख्या कम होती जा रही है। अगर ऐसा ही होता रहा तो कुछ ही दिनों में जंगल में आपके सिवाय और कोई भी नहीं बचेगा। प्रजा के बिना राजा भी कैसे रह सकता है ? यदि हम सभी मर जायेंगे तो आप भी राजा नहीं रहेंगे। हम चाहते हैं कि आप सदा हमारे राजा बने रहें। आपसे हमारी विनती है कि आप अपने घर पर ही रहा करें। हर रोज स्वयं आपके खाने के लिए एक जानवर भेज दिया करेंगे। इस तरह से राजा और प्रजा दोनो ही चैन से रह सकेंगे।’’ शेर को लगा कि जानवरों की बात में सच्चाई है। उसने पलभर सोचा, फिर बोला अच्छी बात है। मैं तुम्हारे सुझाव को मान लेता हूं। लेकिन याद रखना, अगर किसी भी दिन तुमने मेरे खाने के लिये पूरा भोजन नहीं भेजा तो मैं जितने जानवर चाहूंगा, मार डालूंगा।’’ जानवरों के पास तो और कोई चारा नहीं। इसलिये उन्होंने शेर की शर्त मान ली और अपने-अपने घर चले गये।
उस दिन से हर रोज शेर के खाने के लिये एक जानवर भेजा जाने लगा। इसके लिये जंगल में रहने वाले सब जानवरों में से एक-एक जानवर, बारी-बारी से चुना जाता था। कुछ दिन बाद खरगोशों की बारी भी आ गई। शेर के भोजन के लिये एक नन्हें से खरगोश को चुना गया। वह खरगोश जितना छोटा था, उतना ही चतुर भी था। उसने सोचा, बेकार में शेर के हाथों मरना मूर्खता है। अपनी जान बचाने का कोई न कोई उपाय अवश्य करना चाहिये, और हो सके तो कोई ऐसी तरकीब ढूंढ़नी चाहिये जिसे सभी को इस मुसीबत से सदा के लिए छुटकारा मिल जाये। आखिर उसने एक तरकीब सोच ही निकाली।
खरगोश धीरे-धीरे आराम से शेर के घर की ओर चल पड़ा। जब वह शेर के पास पहुंचा तो बहुत देर हो चुकी थी।
भूख के मारे शेर का बुरा हाल हो रहा था। जब उसने सिर्फ एक छोटे से खरगोश को अपनी ओर आते देखा तो गुस्से से बौखला उठा और गरजकर बोला, ‘‘किसने तुम्हें भेजा है ? एक तो पिद्दी जैसे हो, दूसरे इतनी देर से आ रहे हो। जिन बेवकूफों ने तुम्हें भेजा है मैं उन सबको ठीक करूंगा। एक-एक का काम तमाम न किया तो मेरा नाम भी शेर नहीं।’’
नन्हे खरगोश ने आदर से ज़मीन तक झुककर, ‘‘महाराज, अगर आप कृपा करके मेरी बात सुन लें तो मुझे या और जानवरों को दोष नहीं देंगे। वे तो जानते थे कि एक छोटा सा खरगोश आपके भोजन के लिए पूरा नहीं पड़ेगा, ‘इसलिए उन्होंने छह खरगोश भेजे थे। लेकिन रास्ते में हमें एक और शेर मिल गया। उसने पांच खरगोशों को मारकर खा लिया।’’
यह सुनते ही शेर दहाड़कर बोला, ‘‘क्या कहा ? दूसरा शेर ? कौन है वह ? तुमने उसे कहां देखा ?’’
‘‘महाराज, वह तो बहुत ही बड़ा शेर है’’, खरगोश ने कहा, ‘‘वह ज़मीन के अन्दर बनी एक बड़ी गुफा में से निकला था। वह तो मुझे ही मारने जा रहा था। पर मैंने उससे कहा, ‘सरकार, आपको पता नहीं कि आपने क्या अन्धेर कर दिया है। हम सब अपने महाराज के भोजन के लिये जा रहे थे, लेकिन आपने उनका सारा खाना खा लिया है। हमारे महाराज ऐसी बातें सहन नहीं करेंगे। वे ज़रूर ही यहाँ आकर आपको मार डालेंगे।’
‘‘इस पर उसने पूछा, ‘कौन है तुम्हारा राजा ?’ मैंने जवाब दिया, ‘हमारा राजा जंगल का सबसे बड़ा शेर है।’
‘‘महाराज, ‘मेरे ऐसा कहते ही वह गुस्से से लाल-पीला होकर बोला बेवकूफ इस जंगल का राजा सिर्फ मैं हूं। यहां सब जानवर मेरी प्रजा हैं। मैं उनके साथ जैसा चाहूं वैसा कर सकता हूं। जिस मूर्ख को तुम अपना राजा कहते हो उस चोर को मेरे सामने हाजिर करो। मैं उसे बताऊंगा कि असली राजा कौन है।’ महाराज इतना कहकर उस शेर ने आपको लिवाने के लिए मुझे यहां भेज दिया।’’
खरगोश की बात सुनकर शेर को बड़ा गुस्सा आया और वह बार-बार गरजने लगा। उसकी भयानक गरज से सारा जंगल दहलने लगा। ‘‘मुझे फौरन उस मूर्ख का पता बताओ’’, शेर ने दहाड़कर कहा, ‘‘जब तक मैं उसे जान से न मार दूँगा मुझे चैन नहीं मिलेगा।’’ ‘‘बहुत अच्छा महाराज,’’ खरगोश ने कहा ‘‘मौत ही उस दुष्ट की सज़ा है। अगर मैं और बड़ा और मज़बूत होता तो मैं खुद ही उसके टुकड़े-टुकड़े कर देता।’’
‘‘चलो, ‘रास्ता दिखाओ,’’ शेर ने कहा, ‘‘फौरन बताओ किधर चलना है ?’’
‘‘इधर आइये महाराज, इधर, ‘‘खरगोश रास्ता दिखाते हुआ शेर को एक कुएँ के पास ले गया और बोला, ‘‘महाराज, वह दुष्ट शेर ज़मीन के नीचे किले में रहता है। जरा सावधान रहियेगा। किले में छुपा दुश्मन खतरनाक होता है।’’
‘‘मैं उससे निपट लूँगा,’’ शेर ने कहा, ‘‘तुम यह बताओ कि वह है कहाँ ?’’
‘‘पहले जब मैंने उसे देखा था तब तो वह यहीं बाहर खड़ा था। लगता है आपको आता देखकर वह किले में घुस गया। आइये मैं आपको दिखाता हूँ।’’
खरगोश ने कुएं के नजदीक आकर शेर से अन्दर झांकने के लिये कहा। शेर ने कुएं के अन्दर झांका तो उसे कुएं के पानी में अपनी परछाईं दिखाई दी।
परछाईं को देखकर शेर ज़ोर से दहाड़ा। कुएं के अन्दर से आती हुई अपने ही दहाड़ने की गूंज सुनकर उसने समझा कि दूसरा शेर भी दहाड़ रहा है। दुश्मन को तुरंत मार डालने के इरादे से वह फौरन कुएं में कूद पड़ा।
कूदते ही पहले तो वह कुएं की दीवार से टकराया फिर धड़ाम से पानी में गिरा और डूबकर मर गया। इस तरह चतुराई से शेर से छुट्टी पाकर नन्हा खरगोश घर लौटा। उसने जंगल के जानवरों को शेर के मारे जाने की कहानी सुनाई। दुश्मन के मारे जाने की खबर से सारे जंगल में खुशी फैल गई। जंगल के सभी जानवर खरगोश की जय-जयकार करने लगे।

सीख : घोर संकट की परिस्थितियों में भी हमें सूझ बूझ और चतुराई से काम लेना चाहिए और आखिरी दम तक प्रयास करना चाहिए। सूझ बूझ और चतुराई से काम लेकर हम भयंकर संकट से उबर सकते हैं और बड़े से बड़े शक्तिशाली शत्रु को भी पराजित कर सकते हैं।

July 10, 2020

hindi kahaniya panchtantra ||पंचतंत्र की कहानी: कुम्हार की कथा


In this artical you will get the all time favourite panchtantra ki kahaniya in hindi, a sories of a potter in hindi for kids when i was a kid i read panchtantra ki kahaniya in comice booke and i love them ... so i think i will write panchtatra stories in hindi in this blog ...


पंचतंत्र की कहानी: कुम्हार की कथा 


कई सालों पहले की बात है। एक गांव में युधिष्ठिर नाम का एक कुम्हार रहा करता था। दिन में वह मिट्टी के बर्तन बनाता था और जो भी पैसे मिलते थे, उनसे शराब खरीद कर पी लेता।


एक रात वह शराब के नशे में अपने घर लौट रहा था। वह इतना नशे में था कि ठीक से चल भी नही पा रहा था। अचानक उसका पैर लड़खड़ाया और वह जमीन पर गिर पड़ा। जमीन पर कांच के टुकड़े पड़े थे, जिनमें से एक टुकड़ा उसके माथे में घुस गया। उसके माथे से खून बहने लगा। इसके बाद कुम्हार किसी तरह उठा और अपने घर की ओर चल दिया।

अगले दिन जब उसे होश आया तो वह वैद्य के पास गया और पट्टी करवाकर दवाई ली। वैद्य ने कहा, “घाव गहरा होने के कारण इसे भरने में समय लगेगा। पूरा भर जाने के बाद भी इस घाव का निशान नहीं जाएगा।”

इसके बाद कई दिन बीत गए। अचानक उसके गांव में सूखा पड़ गया। सभी लोग गांव छोड़ कर जाने लगे। कुम्हार ने भी गांव छोड़ कर जाने का फैसला किया और दूसरे देश की तरफ निकल गया।


नए देश में जाकर वह राजा के दरबार में नौकरी मांगने गया। वहां राजा ने उसके माथे पर चोट का निशान देखा और सोचा, यह जरूर कोई पराक्रमी योद्धा होगा और दुश्मन से लड़ते समय इसके माथे पर चोट लगी होगी। यह सोचकर राजा ने उसे अपने दरबार में एक खास जगह दे दी और उस पर विशेष ध्यान देने लगे। यह देख कर राजा के दरबार में मौजूद राजकुमार, सेनापति और अन्य मंत्री उससे जलने लगे।

ऐसा कई दिनों तक चलता रहा। एक दिन शत्रुओं ने राजा के महल पर हमला कर दिया। राजा ने अपनी पूरी सेना को युद्ध के लिए तैयार किया। उसने युधिष्ठिर से भी युद्ध में जाने के लिए कहा। युधिष्ठिर जब युद्ध भूमि की तरफ जा रहा था तो राजा ने उससे पूछा कि उसके माथे पर यह चोट किस युद्ध में लगी।

इसपर कुम्हार ने सोचा कि अब वह राजा का भरोसा जीत चुका है और अब अगर वह राजा को सच बता देगा तो कोई समस्या नहीं होगी। यह सोच कर उसने राजा ने कहा, “राजन, मैं कोई योद्धा नहीं हूं। मैं तो एक साधारण-सा कुम्हार हूं। यह चोट मुझे किसी युद्ध में नहीं, बल्कि शराब पीकर गिरने के कारण लगी थी।”


कुम्हार की यह बात सुनकर राजा को बहुत गुस्सा आया। उसने कहा, “तुमने मेरा विश्वास तोड़ा है और मुझे छल कर दरबार में इतना ऊंचा पद पाया है। निकल जाओ मेरे राज्य से।” कुम्हार ने राजा से बहुत मिन्नतें की, उसने कहा कि अगर उसे मौका मिले, तो वह युद्ध में राजा के लिए प्राण भी दे सकता है।

राजा ने कहा, “तुम चाहे जितने भी वीर और पराक्रमी हो, लेकिन तुम शूरवीरों के कुल से नहीं हो। तुम्हारी हालत शेरों के बीच रहने वाले उस गीदड़ की तरह है, जो हाथी से लड़ने की जगह उससे दूर भागने की बात करता है। मैं तुम्हे जाने दे रहा हूं, लेकिन अगर राजकुमारों को तुम्हारा राज पता चल गया, तो वो तुम्हें मार डालेंगे। इसलिए, कहता हूं कि अपनी जान बचाओ और भाग जाओ।” कुम्हार ने राजा की बात मानी और तुरंत उस राज्य को छोड़ कर चला गया।

कहानी से सीख
इस कहानी से यह सीख मिलती है कि इंसान की असलियत ज्यादा दिन तक छुप नहीं सकती, एक न एक दिन राज खुल ही जाता है।

July 10, 2020

hindi kahaniya panchtantra-साधु और चूहे की कहानी||The Hermit And The Mouse Story In Hindi


In this site you will find the hindi kahaniya like hindi motivatinal kahaniya for students, some real life motivaltional stories in hindi,love stories in hindi,horror stories in hindi,motivational shayaris in hindi this site is all about hindi materials ,motivational quotes in hindi,hindi kahaniya panchtantra



साधु और चूहे की कहानी

The Hermit And The Mouse Story In Hindi
बहुत समय पहले की बात है। एक गांव में एक साधु मंदिर में रहा करता था। उनकी दिनचर्या रोजाना प्रभु की भक्ति कराना और आने-जाने वाले लोगों को धर्म का उपदेश देना थी। गांव वाले भी जब भी मंदिर आते, तो साधु को कुछ न कुछ दान में दे जाते थे। इसलिए, साधु को भोजन और वस्त्र की कोई कमी नहीं होती थी। रोज भोजन करने के बाद साधु बचा हुआ खाना छींके में रखकर छत से टांग देता था।

समय ऐसे ही आराम से निकल रहा था, लेकिन अब साधु के साथ एक अजीब-सी घटना होने लगी थी। वह जो खाना छींके में रखता था, गायब हो जाता था। साधु ने परेशान होकर इस बारे में पता लगाने का निर्णय किया। उसने रात को दरवाजे के पीछे से छिपकर देखा कि एक छोटा-सा चूहा उसका भोजन निकालकर ले जाता है। दूसरे दिन उन्होंने छींके को और ऊपर कर दिया, ताकि चूहा उस तक न पहुंच सके, लेकिन यह उपाय भी काम नहीं आया। उन्होंने देखा की चूहा और ऊंची छलांग लगाकर छींके पर चढ़ जाता और भोजन निकाल लेता था। अब साधु चूहे से परेशान रहने लगा था।

एक दिन उस मंदिर में एक भिक्षुक आया। उसने साधु को परेशान देखा और उसकी परेशानी का कारण पूछा, तो साधु ने भिक्षुक को पूरा किस्सा सुना दिया। भिक्षुक ने साधु से कहा कि सबसे पहले यह पता लगाना चाहिए कि चूहे में इतना ऊंचा उछलने की शक्ति कहां से आती है।

उसी रात भिक्षुक और साधु दोनों ने मिलकर पता लगाना चाहा कि आखिर चूहा भोजन कहां ले जाता है।

दोनों ने चुपके से चूहे का पीछा किया और देखा कि मंदिर के पीछे चूहे ने अपना बिल बनाया हुआ है। चूहे के जाने के बाद उन्होंने बिल को खोदा, तो देखा कि चूहे के बिल में खाने-पीने के सामान का बहुत बड़ा भण्डार है। तब भिक्षुक ने कहा कि इसी वजह से ही चूहे में इतना ऊपर उछलने की शक्ति आती है। उन्होंने उस सामग्री काे निकाल लिया और गरीबों में बांटा दिया।

जब चूहा वापस आया, तो उसने वहां पर सब कुछ खाली पाया, तो उसका पूरा आत्मविश्वास समाप्त हो गया। उसने साेचा कि वह फिर से खाने-पीने का सामान इकट्ठा कर लेगा। यह सोचकर उसने रात को छींके के पास जाकर छलांग लगाई, लेकिन आत्मविश्वास की कमी के कारण वह नहीं पहुंच पाया और साधु ने उसे वहां से भगा दिया।

कहानी से सीख
संसाधनों के अभाव में आत्मविश्वास की कमी हो जाती है। इसलिए, जो भी संसाधन आपके पास हों, उसका ध्यान रखना चाहिए।

हिंदी कहानियां

8 Jul 2020

July 08, 2020

Hindi kahaniya -Akbar Birbal ki kahani- न स्त्री है, न पुरुष || akbar birbal story in hindi

Hindi kahaniya [हिंदी कहानियां]
इस आर्टिकल में आपको अकबर बीरबल कि कहानी मिलेगी और  kahaniya.xyz में  hindi stories , motivation Hindi quotes, motivational Hindi story,Hindi kahaniya -Akbar Birbal ki kahaniya, motivational stories for students

आइये पडे़ अकबर बीरबल की कहानी –

1.न स्त्री है, न पुरुष


एक दिन बादशाह और उसके खोजे से आपस में कुछ बातें हो रही थीं, इसी बीच बीरबल की बात आई। तब खोजे ने बीरबल की बड़ी दुर्निन्द की। यह बादशाह का मुंहलगा खोजा था इसलिये खुलेआम उसकी अवहेलना करना उचित न समझकर प्रमाणों द्वारा मुहतोड़ उत्तर देना शुरू किया।

अकबर ने कहा–”तुम स्वयं विचारकर देखो कि मेरे दरबार में बीरबल सा हाज़िर जवाब एक आदमी भी नहीं है।”

खोजा बादशाह के मुख से बीरबल की प्रशंसा सुनकर मन-ही-मन भड़क उठा और बोला–”हुज़ूर, यदि आप बीरबल को हाज़िर जवाब बतलाते हैं तो वह मेरे तीन सवालों का जवाब दे। यदि ठीक-ठीक उत्तर दे देगा तो मैं भी उसे श्रेष्ठ मान लूंगा।”

बादशाह अकबर ने उससे सवाल पूछने को कहा। खोजा बोला–”(१) आकाश में तारों की कितनी संख्या है? (२) दुनियाँ में स्त्री-पुरुष अलग-अलग कितने हैं? (३) धरती अपना बीच कहाँ रखती है?”

बादशाह ने खोजे को अपने पास बैठाकर बीरबल को बुलवाने के लिये सिपाही भेजा। जब वह आया तो उससे खोजे के तीनों सवालों का उत्तर माँगा।

बीरबल चुपके बाज़ार से एक बड़ा मेढ़ा ख़रीद लाया और उसे बादशाह के सामने खड़ा कर बोला–”खोजा साहब! इसके पीठ के बालों की गणना कर लेवें। इसके शरीर में जितने बाल हैं उतने ही आकाश में तारे भी हैं।”

फिर इधर-उधर गोड़ से पड़ताल कर एक जगह ज़मीन में खूँटी गाड़ कर बोला–”पृथ्वीनाथ! पृथ्वी का मध्य यही है, यदि खोजे को यक़ीन न हो तो स्वयं नाप ले।”

जब पहले और तीसरे सवालों के बाद दूसरे की बारी आई तो बीरबल हँस पड़ा परन्तु अपना असली भाव छिपाकर उत्तर दिया–”ग़रीब परवर, स्त्री-पुरुषों की संख्या तो इन खोजों के कारण बिगड़ गई है, क्योंकि ये न तो स्त्रियों की संख्या में आते हैं और न पुरुषों की ही। यदि सब खोजे जान से मरवा दिये जाएँ तो ठीक-ठीक गणना निकल सकती है।”

खोजे का मुँह छोटा हो गया। उसके मुँह से एक बात भी न निकली। बादशाह ने बहुत कुछ उसे भला-बुरा सुनाया। बिचारा लाज का मारा, दुम दबाकर जनानख़ाने में चला गया। बादशाह ने बीरबल को पारितोषिक देकर विदा किया।






July 08, 2020

5 Motivational Stories in Hindi for SUCCESS | 5 प्रेरणादायक कहानियाँ जो प्रत्येक व्यक्ति को पढनी चाहिए


नमस्कार दोस्तों, इस हिंदी ब्लॉग पर आपका फिर से स्वागत है। आज कई दिनों के बाद मैं आप सब के लिए लेकर आया हूँ 5 प्रेरणादायक कहानियाँ [5 best motivational stories in hindi ]. हमने इससे पहले भी कई प्रेरणादायक कहानियाँ [मोटीवेशनल स्टोरीज] हमारे ब्लॉग पर अपलोड की हैं,यदि आपको ये प्रेरणादायक [motivationa stories] पसंद आये तो इस पोस्ट को फेसबुक, Instagram, WhatsApp पर शेयर जरुर करियेगा.



1. सोच समझ कर बोलें - प्रेरणादायक हिंदी कहानी

एक व्यक्ति ने एक पादरी के सामने अपने पड़ोसी की खूब निंदा कि. बाद में जब उसे अपनी गलती का अहसास हुआ, तो वह पुनः पादरी के पास पहुंचा और उस गलती के लिए क्षमा याचना करने लगा. पादरी ने उससे कहा कि वह पंखो से भरा एक थैला शहर के बीचोबीच बिखेर दे. उस व्यक्ति ने पादरी कि बात सुनकर ऐसा ही किया और फिर पादरी के पास पहुँच गया.


उस व्यक्ति की बात सुनकर पादरी ने उससे कहा कि जाओ और उन सभी पंखो को फिर से थैले में भरकर वापस ले आओ. वह व्यक्ति थोड़ा हिचका पर पादरी का आदेश मानते हुए उसने ऐसा करने की कोशिश की. काफी प्रयत्न करने के बाद भी वह सभी पंखो जमा नहीं कर सका. जब आधा भरा थैला लेकर वह पादरी के सामने पहुंचा तो पादरी ने उससे कहा की यही बात हमारे जीवन में भी लागू होती है.


जिस तरह तुम पंख वापस नहीं ला सकते, उसी तरह तुम्हारे कटु वचन को भी वापस नहीं किया जा सकता. उस व्यक्ति का जो नुकसान हुआ है, अब उसकी भरपाई संभव नहीं है. आलोचना का मतलब नकारात्मक बातें करना और शिकायत करना ही नहीं होता बल्कि आलोचना सकारात्मक भी हो सकती है. आपकी कोशिश यह होनी चहिये की आपकी आलोचना से, आपके द्वारा सुझाये विचारो से उसकी सहायता हो जाएँ.


शिक्षा/Moral:- दोस्तों कई बार देखा गया है कि माँ – बाप के द्वारा बच्चो से की गई बातचीत का ढंग उनके भविष्य कि रूपरेखा भी तय कर देता है. इसलिए घर से लेकर बाहर दोस्तों के साथ कुछ भी कहने में सावधानी बरतें. इसलिए अगर आप समझ कर बोलेंगे तो हमेशा फायदे में रहेंगे.


2. ऋषि और चूहा - Motivational Moral Story in Hindi

एक वन में एक ऋषि रहते थे. उनके डेरे पर बहुत दिनों से एक चूहा भी रहता आ रहा था. यह चूहा ऋषि से बहुत प्यार करता था. जब वे तपस्या में मग्न होते तो वह बड़े आनंद से उनके पास बैठा भजन सुनता रहता. यहाँ तक कि वह स्वयं भी ईश्वर की उपासना करने लगा था. लेकिन कुत्ते – बिल्ली और चील – कौवे आदि से वह सदा डरा – डरा और सहमा हुआ सा रहता.

एक बार ऋषि के मन में उस चूहे के प्रति बहुत दया आ गयी. वे सोचने लगे कि यह बेचारा चूहा हर समय डरा – सा रहता है, क्यों न इसे शेर बना दिया जाए. ताकि इस बेचारे का डर समाप्त हो जाए और यह बेधड़क होकर हर स्थान पर घूम सके. ऋषि बहुत बड़ी दैवीय शक्ति के स्वामी थे. उन्होंने अपनी शक्ति के बल पर उस चूहे को शेर बना दिया और सोचने लगे की अब यह चूहा किसी भी जानवर से न डरेगा और निर्भय होकर पूरे जंगल में घूम सकेगा.

लेकिन चूहे से शेर बनते ही चूहे की सारी सोच बदल गई. वह सारे वन में बेधड़क घूमता. उससे अब सारे जानवर डरने लगे और प्रणाम करने लगे. उसकी जय – जयकार होने लगी. किन्तु ऋषि यह बात जानते थे कि यह मात्र एक चूहा है. वास्तव में शेर नहीं है.

अतः ऋषि उससे चूहा समझकर ही व्यवहार करते. यह बात चूहे को पसंद नहीं आई की कोई भी उसे चूहा समझ कर ही व्यवहार करे. वह सोचने लगा की ऐसे में तो दूसरे जानवरों पर भी बुरा असर पड़ेगा. लोग उसका जितना मान करते है, उससे अधिक घृणा और अनादर करना आरम्भ कर देंगे.

अतः चूहे ने सोचा कि क्यों न मैं इस ऋषि को ही मार डालूं. फिर न रहेगा बाँस, न बजेगी बांसुरी. यही सोचकर वह ऋषि को मारने के लिए चल पड़ा. ऋषि ने जैसे ही क्रोध से भरे शेर को अपनी ओर आते देखा तो वे उसके मन की बात समझ गये. उनको शेर पर बड़ा क्रोध आ गया.

अतः उसका घमंड तोड़ने के लिए  ऋषि ने अपनी दैवीय शक्ति से उसे एक बार फिर चूहा बना दिया.

शिक्षा/Moral:- दोस्तों! हमें कभी भी अपने हितैषी का अहित नहीं करना चाहिए, चाहे हम कितने ही बलशाली क्यों न हो जाए. हमें उन लोगो को हमेशा याद रखना चाहिए जिन्होंने हमारे बुरे वक्त में हमारा साथ दिया होता है. इसके अलावा हमें अपने बीते वक्त को भी नहीं भूलना चाहिए. चूहा यदि अपनी असलियत याद रखता तो उसे फिर से चूहा नहीं बनना पड़ता. बीता हुआ समय हमें घमंड से बाहर निकालता है.


3. आलस्य का त्याग करे - Motivational Story in Hindi


एक बड़े शहर में एक घर में तीन भाई रहते थे. यूँ तो तीनो साथ रहते थे, लेकिन तीनो को एक – दूसरे के सुख-दुःख से कोई लेना-देना नहीं था. तीनो अपनी ही दुनिया में खोये रहते थे, उन्हें किसी और की परवाह नहीं थी. अचानक एक दिन आधी रात को छोटे भाई का बच्चा जग गया और जोर-जोर से रोने लगा. उसने सिर में बहुत तेज दर्द होने की शिकायत की.


रात काफी हो जाने के कारण दवा की सारी दुकाने बंद हो चुकी थी. घर में भी कोई दवा नहीं थी. उस बच्चे के माता-पिता दोनों ने अपने तरीके से उसे खूब बहलाने और चुप कराने का प्रयास किया पर उनका यह सारा प्रयास बेकार गया. वह अभी भी रोने में लगा था. सभी भाई बच्चे की आवाज सुनकर उठ गये लेकिन कोई भी उसकी मदद के लिए आगे नहीं आया.


तीनो भाइयो के घर के सामने एक झोपड़ी थी. उसमे एक अधेड़ उम्र की महिला थकी – मंदी सो रही थी. अचानक उसे बच्चे की रोने की आवाज सुनाई दी. परन्तु उसे भी आँखे खोलनी की इच्छा नहीं हो रही थी, लेकिन उसने सोचा अगर बच्चे को दर्द से राहत मिल जाती है तो सभी लोग चैन से सो सकेंगे. उसने तुरंत आलस्य त्याग कर बच्चे की माँ को आवाज लगाई – ठण्ड लगने के कारण बच्चा रो रहा है. यह ले जाओ काढ़ा. इसे पीते ही उसे सिर दर्द से आराम मिल जायेगा.


बुढ़िया की आवाज सुनकर बच्चे की माँ उस बुढ़िया के पास गई और झिझकते हुए वहां से काढ़ा ले गई और अपने बच्चे को पिला दिया. काढ़ा पीने के कुछ ही पलों बाद बच्चे को दर्द से राहत मिल गई और बच्चे के साथ – साथ सभी लोग चैन से सो गये.


शिक्षा/Moral:- इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि आलस्य त्यागकर ही किसी दूसरे की मदद की जा सकती है. यह ज़िन्दगी बहुत छोटी है हमें इसे आलस्य में नहीं गुजारना चाहिए बल्कि इस जीवन का सदुपयोग करना चाहिए साथ ही हमें परोपकार के गुण को भूलना नहीं चाहिए जब कभी भी परोपकार करने का मौका मिले तो हमें खुद से जो भी सहायता हो सके वह करनी चाहिए.

4. ख़ुशी का राज - Motivational Moral Story in Hindi


एक शहर में विजय नाम का एक अमीर व्यापारी रहता था. उस व्यक्ति के पास बहुत अधिक धन था. एक दिन उसने अपनी पत्नी अंजू को करोडो रूपये का एक नेकलेस गिफ्ट किया जिस कारण उसकी पत्नी अंजू को उस नेकलेस से काफी लगाव था.

एक बार वे दोनों एक धर्मयात्रा पर निकले. धर्मयात्रा में चलते – चलते वे एक धर्मस्थल में पहुंचे जहाँ अचानक एक नटखट बन्दर अंजू के नेकलेस को झपटकर ले गया और उस बन्दर ने उसे एक ऊँचे पेड़ की टहनी में टांग दिया.

अंजू ने उस नेकलेस को निकालने की कोशिश की पर वह नाकाम हुई और उसे देखकर वहां और लोग भी उस नेकलेस को निकालने में जुट गये. लेकिन वे लोग भी उस नेकलेस को निकालने में असमर्थ रहे.

अचानक लोगो को लगा की बन्दर ने उस नेकलेस को नीचे बहते गंदे नाले में गिरा दिया. कुछ लोगो ने उस नेकलेस को निकालने के लिए नाले में छलांग लगा दी. तभी उधर से गुजर रहे एक गुरूजी को यह सब देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ.

उन्होंने गौर से देखा तो पाया की जिस नेकलेस को पाने के लिए लोग नाले में कूदे है, वह नेकलेस तो अभी भी पेड़ में लटक रहा है.

उन्होंने उन लोगो से कहा की आप जिस चीज को एक नाले में पाने की कोशिश कर रहे हो, वह तो सिर्फ उसकी परछाई है. असली चीज तो अभी भी पेड़ से लटक रही है. यह सब देखकर वे लोग हताश हो गये.


शिक्षा/Moral:- इस कहानी की शिक्षा यह है कि हम बाहर की चीजो में खुशियाँ ढूंढते रहते है और उन चीजो से खुद को खुश रखना चाहते है किन्तु इन बाहरी चीजो से हमें क्षणिक भर ख़ुशी तो मिल सकती है लेकिन असली ख़ुशी हमें तब ही मिलती है जब हमारा अंतरमन खुश हो. इसलिए खुशियाँ पाने के लिए बाहरी चीजो के बजाय खुद के अन्दर झांककर देखे.

5. काले कौवे की दुःखी कहानी - Motivational Story in Hindi

एक जंगल में एक कौवा रहता था और वह अपनी जिंदगी से बहुत दुखी था.वह जब भी जंगल में घूमता तो दुसरे पक्षियों को भी देखता था और उन्हें देखकर उसे लगता की उसका रंग बहुत काला है और यही उसके दुःख का असली कारण था. अब रोज का यही सिलसिला था तो वह कौवा उदास रहने लग गया था।


एक दिन जब वह जंगल में उड़ रहा था तो उसने एक तालाब में बतख को तैरते देखा तो वह एक पेड़ में बैठ गया और सोचने लगा की यह बतख कितना सफ़ेद है.काश मेरा भी रंग सफ़ेद होता. फिर कुछ देर बाद वह कौवा बतख के पास गया|


बतख के पास जाते ही कौवा उससे बोला- तुम बहुत खुशकिस्मत हो जो तुम्हारा रंग सफ़ेद है. बतख ने कौवे की बात सुनी|


बतख ने कौवे से बोला- हाँ मैं सफ़ेद तो हूँ लेकिन जब मैं हरे रंग के तोते को देखता हूँ तो मुझे अपने इस सफ़ेद रंग से गुस्सा आता है।


बतख की बात सुनकर वह कौवा वहा से चला गया और कुछ समय बाद वह तोते के पास पहुंचा.


कौवा तोते से बोला- तुम्हारा रंग तो बहुत सुन्दर है तुमको यह देखकर बहुत अच्छा लगता होगा।


कौवे की बात सुनकर तोता बोला- हाँ,मुझे लगता तो अच्छा है की मैं इतना सुंदर हूँ लेकिन मैं सिर्फ हरा हूँ और जब कभी भी मैं मोर को देख लेता हूँ तो मुझे बहुत बुरा लगता है क्योंकि मोर बहुत खुबसूरत है और उसके पास बहुत सारे रंग है.


कौवे को लगा यह बात भी सही है क्यों न अब मोर के पास ही चला जाय.


वह कौवा जंगल में मोर को ढूढने लगा किन्तु उसे मोर नहीं मिला फिर वह कुछ दिन बाद एक चिड़ियाघर में जा पहुंचा.


जहा उसे मोर दिख गया लेकिन मोर को देखने के लिए बहुत सारे लोगो की भीड़ जमा हुई थी तो कौवा उन लोगो के जाने का इन्तेजार करने लगा. जब वे सब लोग चले गये तो...


कौवा मोर के पास पहुंचा और मोर से बोला- वाह मोर,तुम तो सच में बहुत खुबसूरत हो तभी सब तुम्हारी इतनी तारीफ करते है. तुमको तो खुद पर बहुत गर्व महसूस होता होगा.


कौवे की बात सुनकर मोर बड़े दुःख के साथ बोला- तुम्हारी बात बिल्कुल ठीक है पर मेरे अलावा इस दुनिया में कोई और दूसरा खुबसूरत पक्षी नहीं है इसलिए मैं यहाँ चिड़ियाघर में कैद हूँ।


यहाँ पर सब मेरी रखवाली करते है जिस कारण में कही भी नहीं जा सकता और अपने मन के मुताबिक कुछ भी नहीं कर सकता है.


मैं भी काश तुम्हारी तरह कौवा होता तो मुझे भी कोई कैद करके नहीं रखता और मैं भी हमेशा तुम्हारी तरह खुले आसमान में जहा चाहो वहा घूमता रहता पर एक मोर के लिए यह सब मुमकिन नहीं.


कौवे ने मोर की सारी बातें सुनी और फिर वहा से चले गया और सारी बात समझ गया. उसे इस बात का अहसास हो गया था कि सिर्फ वो ही नहीं बल्कि हर कोई उसकी तरह दुखी और परेशान है।


इस कहानी की प्रेरणा- कोई आदमी कितना सुखी है वह सिर्फ वो ही आदमी जानता है क्योंकि हर किसी के अपने जीवन में कई परेशानीयाँ होती है अपने दुःख होते है। इसलिए हमें दुसरे के सुख से जलन न करते हुए उससे सीखना चाहिए तथा खुद में जो अच्छी चीजे है उनको देखना चाहिए न की कमजोरी को. अगर कोई कमजोरी होती भी है तो उसे दूर करना चाहिये.





7 Jul 2020

July 07, 2020

Hindi kahaniya - हाथी और छः अंधे व्यक्ति Hindi moral Story for Kids

Hindi kahaniya [हिंदी कहानियां]

नमस्कार दोस्तों, हिंदी कहानियां ब्लॉग पर आपका फिर से स्वागत है। आज कई दिनों के बाद मैं आप सब के लिए लेकर आया हूँ प्रेरणादायक कहानियाँ [motivational stories in hindi for kids ]. हमने इससे पहले भी कई प्रेरणादायक कहानियाँ [motivational stories] हमारे ब्लॉग पर अपलोड की हैं,यदि आपको ये प्रेरणादायक motivationa stories पसंद आये तो इस पोस्ट को फेसबुक, Instagram, WhatsApp पर शेयर जरुर करियेगा.

चलिए कहानी पे आते है ....

हाथी और छः अंधे व्यक्ति Hindi moral Story for Kids


बहुत समय पहले की बात है , किसी गावं में 6 अंधे आदमी रहते थे. एक दिन गाँव वालों ने उन्हें बताया , ” अरे , आज गावँ में हाथी आया है.” उन्होंने आज तक बस हाथियों के बारे में सुना था पर कभी छू कर महसूस नहीं किया था. उन्होंने ने निश्चय किया, ” भले ही हम हाथी को देख नहीं सकते , पर आज हम सब चल कर उसे महसूस तो कर सकते हैं ना?” और फिर वो सब उस जगह की तरफ बढ़ चले जहाँ हाथी आया हुआ था.
सभी ने हाथी को छूना शुरू किया.
” मैं समझ गया, हाथी एक खम्भे की तरह होता है”, पहले व्यक्ति ने हाथी का पैर छूते हुए कहा.
“अरे नहीं, हाथी तो रस्सी की तरह होता है.” दूसरे व्यक्ति ने पूँछ पकड़ते हुए कहा.
“मैं बताता हूँ, ये तो पेड़ के तने की तरह है.”, तीसरे व्यक्ति ने सूंढ़ पकड़ते हुए कहा.
” तुम लोग क्या बात कर रहे हो, हाथी एक बड़े हाथ के पंखे की तरह होता है.” , चौथे व्यक्ति ने कान छूते हुए सभी को समझाया.
“नहीं-नहीं , ये तो एक दीवार की तरह है.”, पांचवे व्यक्ति ने पेट पर हाथ रखते हुए कहा.
” ऐसा नहीं है , हाथी तो एक कठोर नली की तरह होता है.”, छठे व्यक्ति ने अपनी बात रखी.
और फिर सभी आपस में बहस करने लगे और खुद को सही साबित करने में लग गए.. ..उनकी बहस तेज होती गयी और ऐसा लगने लगा मानो वो आपस में लड़ ही पड़ेंगे.
तभी वहां से एक बुद्धिमान व्यक्ति गुजर रहा था. वह रुका और उनसे पूछा,” क्या बात है तुम सब आपस में झगड़ क्यों रहे हो?”
” हम यह नहीं तय कर पा रहे हैं कि आखिर हाथी दीखता कैसा है.” , उन्होंने ने उत्तर दिया.
और फिर बारी बारी से उन्होंने अपनी बात उस व्यक्ति को समझाई.
बुद्धिमान व्यक्ति ने सभी की बात शांति से सुनी और बोला ,” तुम सब अपनी-अपनी जगह सही हो. तुम्हारे वर्णन में अंतर इसलिए है क्योंकि तुम सबने हाथी के अलग-अलग भाग छुए
हैं, पर देखा जाए तो तुम लोगो ने जो कुछ भी बताया वो सभी बाते हाथी के वर्णन के लिए सही बैठती हैं.”
” अच्छा !! ऐसा है.” सभी ने एक साथ उत्तर दिया . उसके बाद कोई विवाद नहीं हुआ ,और सभी खुश हो गए कि वो सभी सच कह रहे थे.

दोस्तों, कई बार ऐसा होता है कि हम अपनी बात को लेकर अड़ जाते हैं कि हम ही सही हैं और बाकी सब गलत है. लेकिन यह संभव है कि हमें सिक्के का एक ही पहलु दिख रहा हो और उसके आलावा भी कुछ ऐसे तथ्य हों जो सही हों. इसलिए हमें अपनी बात तो रखनी चाहिए पर दूसरों की बात भी सब्र से सुननी चाहिए , और कभी भी बेकार की बहस में नहीं पड़ना चाहिए. वेदों में भी कहा गया है कि एक सत्य को कई तरीके से बताया जा सकता है. तो , जब अगली बार आप ऐसी किसी बहस में पड़ें तो याद कर लीजियेगा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि आपके हाथ में सिर्फ पूँछ है और बाकी हिस्से किसी और के पास हैं.

 motivationa stories पसंद आये तो इस पोस्ट को फेसबुक, Instagram, WhatsApp पर शेयर जरुर करियेगा.
July 07, 2020

Hindi kahaniya - 5 Motivational Stories in Hindi for students

हिंदी कहानियां [Hindi kahaniya]
kahaniya.xyz blog provide you hindi motivational stories,hindi kahaniya,hindi motivational quotes,hindi motivational quotes image,hindi kahaniya for kids ,hindi motivational story for children, short motivational Hindi kahaniya, motivational kahaniya

सुख और दुःख तो सभी के जीवन में आते है लेकिन ये हम पर निर्भर करता है की हम उन्हें कैसे देखते है और उनका हल कैसे ढूंढते है. जीवन में कभी हार नहीं मानने के लिए हमेशा motivated रहने की जरुरत होती है. आज की इस पोस्ट में हम इसी मोटिवेशन के बारे 5 Motivational Stories in Hindi For Students आपके साथ शेयर कर रहें है. इन कहानियों से न केवल मोटिवेशन मिलेगा बल्कि आपको इन कहानियों से कई सीख यानी मोरल एजुकेशन भी मिलेगी. अगर आपको ये कहानियाँ पसंद आये तो कृपया करके इस पोस्ट को फेसबुक, whatsapp और instagram पर शेयर जरुर कीजियेगा और ऐसी ही और अच्छी और प्रेरणादायक कहानियों के लिए जुड़े रहिये इंस्पायर्ड हिंदी ब्लॉग से.

तो आईये पढ़ते है...



1. परमात्मा और किसान - Motivational Story

एक बार एक किसान परमात्मा से बड़ा नाराज हो गया! कभी बाढ़ आ जाये, कभी सूखा पड़ जाए, कभी धूप बहुत तेज हो जाए तो कभी ओले पड़ जाये! हर बार कुछ ना कुछ कारण से उसकी फसल थोड़ी ख़राब हो जा रही थी|


एक दिन बड़ा तंग आ कर उसने परमात्मा से कहा- देखिये प्रभु, आप परमात्मा हैं, लेकिन लगता है आपको खेती-बाड़ी की ज्यादा जानकारी नहीं है, एक प्रार्थना है कि एक साल मुझे मौका दीजिये, जैसा मै चाहू वैसा मौसम हो, फिर आप देखना मै कैसे अन्न के भण्डार भर दूंगा! परमात्मा मुस्कुराये और कहा ठीक है, जैसा तुम कहोगे वैसा ही मौसम दूंगा, मै दखल नहीं करूँगा!


किसान ने गेहूं की फ़सल बोई, जब धूप चाही, तब धूप मिली, जब पानी तब पानी! तेज धूप, ओले, बाढ़, आंधी तो उसने आने ही नहीं दी, समय के साथ फसल बढ़ी हो गई और किसान की ख़ुशी भी क्योंकि ऐसी फसल तो आज तक नहीं हुई थी!  किसान ने मन ही मन सोचा अब पता चलेगा परमात्मा को, की फ़सल कैसे करते हैं, बेकार ही इतने बरस हम किसानो को परेशान करते रहे|


फ़सल काटने का समय भी आया, किसान बड़े गर्व से फ़सल काटने गया, लेकिन जैसे ही फसल काटने लगा, एकदम से छाती पर हाथ रख कर बैठ गया! गेहूं की एक भी बाली के अन्दर गेहूं नहीं था ,सारी बालियाँ अन्दर से खाली थी,


बड़ा दुखी होकर उसने परमात्मा से कहा- प्रभु ये क्या हुआ?


तब परमात्मा बोले-ये तो होना ही था, तुमने पौधों को संघर्ष का ज़रा सा भी मौका नहीं दिया.


ना तेज धूप में उनको तपने दिया, ना आंधी ओलों से जूझने दिया, उनको किसी प्रकार की चुनौती का अहसास जरा भी नहीं होने दिया| इसीलिए सब पौधे खोखले रह गए, जब आंधी आती है, तेज बारिश होती है ओले गिरते हैं तब पोधा अपने बल से ही खड़ा रहता है, वो अपना अस्तित्व बचाने का संघर्ष करता है और इस संघर्ष से जो बल पैदा होता है वोही उसे शक्ति देता है, उर्जा देता है, उसकी जीवटता को उभारता है|


सोने को भी कुंदन बनने के लिए आग में तपने, हथौड़ी से पिटने, गलने जैसी चुनोतियो से गुजरना पड़ता है तभी उसकी स्वर्णिम आभा उभरती है और उसे अनमोल बनाती है!


उसी तरह जिंदगी में भी अगर संघर्ष ना हो, चुनौती ना हो तो आदमी खोखला ही रह जाता है, उसके अन्दर कोई गुण नहीं आ पाता!


ये चुनोतियाँ ही हैं जो आदमी रूपी तलवार को धार देती हैं, उसे शक्त और प्रखर बनाती हैं| अगर प्रतिभाशाली बनना है तो चुनोतियाँ स्वीकार करनी ही पड़ेंगी, अन्यथा हम खोखले ही रह जायेंगे. अगर जिंदगी में प्रखर बनना है ,प्रतिभाशाली बनना है ,तो संघर्ष और चुनोतियो का सामना तो करना ही पड़ेगा!

यह भी पड़े -हाथी – Elephant Rope Story

2. आलू, अंडा और कॉफ़ी बीन्स - motivational stories 


एक दिन एक छोटी सी लड़की अपने पिता को दुख व्यक्त करते-करते अपने जीवन को कोसते हुए यह बता रही थी कि उसका जीवन बहुत ही मुश्किल दौर से गुज़र रहा है । साथ ही उसके जीवन में एक दुख का समय जाता है तो दूसरा चला आ रहा है और वह इन मुश्किलों से लड़ लड़ कर अब थक चुकी है । वह करे तो क्या करे !


उसके पिता प्रोफेशन से एक शाहकार (Chef) थे । अपनी बेटी के इन शब्दों को सुनने के बाद वह अपनी बेटी को रसोईघर लेगया और 3 कढाई में पानी डाल कर तेज आग पर रख दिया । जैसे ही पानी गरम हो कर उबलने लगे, पिता नें एक कढाई एक आलू डाला, दुसरे में एक अंडा और तीसरे में कुछ कॉफ़ी बीन्स दल दिए ।


वह लड़की बिना कोई प्रश्न किये अपने पिता के इस काम को ध्यान से देख रही थी ।


कुछ 15-20 मिनट के बाद उन्होंने आग बंद कर दिया और एक कटोरे में आलू को रखा, दुसरे में अंडे और कॉफ़ी बीन्स वाले पानी को कप में । पिता ने बेटी की तरफ उन तीनों कटोरों दिखाते हुए एक साथ कहा ! आलू, अंडे, और कॉफ़ी बीन्स ।


पिता ने दुबारा बताते हुए बेटी से कहा !


पास से देखो इन तीनों चीजों को –


बेटी ने आलू को देखा जो उबलने के कारण मुलायम हो गया था । उसके बाद अंडा को देखा जो उबलने के बाद अन्दर से कठिन हो गया था । और आखरी में जब कॉफ़ी बीन्स को देखा तो उस पानी से बहुत ही अच्छी खुशबु आरही थी।


पिता ने बेटी से पुछा-क्या तुमको पता चला इसका मतलब क्या है ?


तब उसके पिता ने समझाते हुए कहा इन तीनो चीजों ने अलग अलग तरीके से प्रतिक्रिया किया परन्तु जो मुश्किल उन्होंने झेला वह समान था।


साथ ही उसने अपनी बेटी से प्रश्न किया-जब विपरीत परिस्तिथि तुम्हारे जीवन में आते हैं तो तुम क्या बनना चाहोगे आलू, अंडा या कॉफ़ी बीन्स।


शिक्षा/Moral:- इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि जीवन में परिस्तिथि चाहें जितने भी बड़े हो वह उस मनुष्य के ऊपर है कि वह कितना झेल सकता है।

3. ज़िन्दगी के पत्थर, कंकड़ और रेत - Hindi Story with Moral

Philosophy के एक Professor ने कुछ चीजों के साथ Class में प्रवेश किया.

जब Class शुरू हुई तो उन्होंने एक बड़ा सा खाली शीशे का जार लिया और उसमे पत्थर के बड़े-बड़े टुकड़े भरने लगे.

Professor ने फिर Students से पूछा- कि क्या जार भर गया है? और सभी ने कहा “हाँ.

तब प्रोफ़ेसर ने छोटे-छोटे कंकडों से भरा एक Box लिया और उन्हें जार में भरने लगे.

जार को थोडा हिलाने पर ये कंकड़ पत्थरों के बीच settle हो गए.

एक बार फिर प्रोफ़ेसर ने छात्रों से पूछा कि- क्या जार भर गया है? और सभी ने हाँ में उत्तर दिया.

तभी Professor ने एक Sand Box निकाला और उसमे भरी रेत को जार में डालने लगे. रेत ने बची-खुची जगह भी भर दी और एक बार फिर उन्होंने पूछा कि क्या जार भर गया है? और सभी ने एक साथ उत्तर दिया, ” हाँ”

फिर Professor ने समझाना शुरू किया-” मैं चाहता हूँ कि आप इस बात को समझें कि ये जार आपकी Life को Represent करता है.

बड़े-बड़े पत्थर आपके जीवन की ज़रूरी चीजें हैं- आपकी Family, आपका Partner, आपकी Health आदि| अगर आपकी बाकी सारी चीजें खो भी जाएँ और सिर्फ ये रहे तो भी आपकी ज़िन्दगी पूर्ण रहेगी.

ये कंकड़ कुछ अन्य चीजें हैं जो Matter करती हैं- जैसे कि आपकी Job, आपका घर, इत्यादि. और ये रेत बाकी सभी छोटी-मोटी चीजों को दर्शाती है.

शिक्षा/Moral:- अगर आप जार को पहले रेत से भर देंगे तो कंकडों और पत्थरों के लिए कोई जगह नहीं बचेगी. यही आपकी life के साथ होता है. अगर आप अपनी सारा समय और उर्जा छोटी-छोटी चीजों में लगा देंगे तो आपके पास कभी उन चीजों के लिए समय नहीं होगा जो आपके लिए महत्त्वपूर्ण हैं. उन चीजों पर ध्यान दीजिये जो आपकी खुशियों के लिए ज़रूरी हैं.
यह भी पड़े :- elephant rope story

4. क्रोध पर विजय - Motivational Story in Hindi

बहुत प्राचीन बात है। किसी गाँव में एक बुर्जुग महात्मा रहते थे। दूर-दूर से लोग शिक्षा गृहण करने के उद्देश्य से अपने बच्चों को उनके आश्रम में भेजते थे। एक दिन महात्मा जी के पास कमल नाम का एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति आया।

‘गुरु जी मुझे अपने श्रीचरणों में जगह दे दीजिए। अब मेरी कोई कामना बाकी नहीं रही है। मैं आश्रम में रहकर आपके आज्ञानुसार समाज को अभी तक प्राप्त किया हुआ ज्ञान वितरित करना चाहता हूँ।‘ पारखी वृद्ध महात्मा ने एकदम समझ लिया कि यह व्यक्ति काबिल है, इसकी कामना सच्ची है और यह समाज के प्रति अपने दायित्व को निभाने के लिए कृतसंकल्पित है।

कमल उनके चरणों में गिरकर प्रार्थना किये जा रहा था-गुरु जी! मुझे अपने श्रीचरणों में स्थान दें।

महात्मा जी ने कहा-‘पुत्र! आश्रम की परम्परा है कि तुम स्नान करके पवित्र हो और भगवान के आगे संकल्प धारण करो कि अपना कृतव्य सही तरीके से निभाओगे। अतः इस कार्य के लिए तुम कल प्रातः स्नान करके आश्रम आ जाना।’

उसके जाते ही वृद्ध महात्मा जी ने साफ-सफाई का कार्य करने वाली महिला को अपने पास बुलाया और कहा ‘कल सुबह यह नया शिक्षक आयेगा। जैसे ही यह आश्रम के नजदीक आये, तुम इस प्रकार से झाड़ू लगाना कि उसके चेहरे पर धूल गिर जाए। लेकिन यह कार्य थोड़ा सावधानी से करना। वह तुम पर हाथ भी छोड़ सकता है। महिला महात्मा जी की बहुत सम्मान करती थी। उसने उनकी आज्ञा को सहर्ष स्वीकार कर लिया।

अति प्रसन्न मुद्रा में कमल नहा-धोकर इठलाता हुआ आश्रम आने लगा। जैसे ही वह नजदीक पहुँचा, महिला ने तेजी से झाड़ू लगाना शुरू कर दिया। कमल के पूरे चेहरे में धूल चली गई। उसके क्रोध की सीमा न रही। पास पड़े पत्थर को उठाकर वह महिला को मारने के लिए दौड़ा। महिला पहले ही सावधान थी। वह झाड़ू फैंक-फांक के वहाँ से भाग खड़ी हुई। अधेड़ के मुख में जो आया बकता चला गया।

कमल वापिस घर गया और दुबारा स्नान करके महात्मा के पास लौटा।

महात्मा जी ने कहा-‘अभी तो तुम जानवरों के समान लडने के लिए दौड़ते-चिल्लाते हो। तुमसे अभी यहाँ शिक्षण कार्य नहीं होगा। तुम एक वर्ष के बाद आना तब तक जो कार्य करते हो वही करते रहो।’

कमल की इच्छा सच्ची थी। उसकी महात्मा में श्रद्धा भी सच्ची थी। वर्ष पूरा होते ही वह फिर महात्मा जी के समीप उपस्थित हुआ।

महात्मा जी ने आदेश दिया- ‘पुत्र तुम कल स्नान करके प्रातः आना।’

कमल के जाते ही महात्मा जी ने सफाई कर्मचारी को बुला कर कहा-‘वह फिर आ रहा है। इस बार मार्ग में झाड़ू इस तरह से लगाना कि धूल के साथ-साथ उस पर झाड़ू की हल्की सी चोट भी लग जाए। डरना मत, वह तुम्हें मारेगा नहीं। कुछ भी बोले तो चुपचाप सुनते रहना।’

अगले दिन स्नान-ध्यान करके वह व्यक्ति जैसे ही द्वार तक पहुंचा। महिला झाड़ू लगाते हुए पहुंच गयी। महिला ने आदेशानुसार जानबूझकर झाड़ू उस पर इस प्रकार से छुआ कि कपड़े भी गंदे हो गये।

कमल को बहुत क्रोध आया, पर झगड़ने की बात उसके मन में नहीं आयी। वह केवल महिला को गालियाँ बक कर फिर स्नान करने घर लौट गया।

जब वह महात्मा जी के पास वापिस पहुंचा, संत ने कहा-‘तुम्हारी काबिलियत में मुझे संदेह है। एक वर्ष के बाद यहाँ आना।’

एक वर्ष और बीत गया। कमल महात्मा जी के पास आया। उसे पूर्व के भांति स्नान-ध्यान करके आने की आज्ञा मिली।

महात्मा जी ने उसके जाते ही उसी महिला को फिर बुलाया- ‘इस बार सुबह जब वह आये तो तुम इस बार अपनी कचड़े की टोकरी उस पर उड़ेल देना।’

साफ-सफाई करने वाली महिला डर गयी।

महिला ने कहा- ‘वह तो अति कठोर स्वभाव का है। ऐसा करने पर तो वह अत्यंत क्रोधित होगा और मार-पीट पर उतर जायेगा।’

महात्मा जी ने उसे आश्वासन दिया-‘चिन्ता मत करो। इस बार वह कुछ नहीं कहेगा। इसलिए तुम्हें भागने की आवश्यकता नहीं है।’

सुबह जैसे ही कमल आश्रम पहुँचा। महिला ने अनजान बनकर पूरा कूड़ा-कचरा उस पर उड़ेल दिया।

पर यह क्या! इस बार न तो वह गुस्सा हुआ और न ही मार-पीट के लिए दौड़ा।

कमल ने कहा- ‘माता! आप मेरी गुरु हैं। ’

कमल ने महिला के सामने अपना मस्तक झुका कर कहा... ‘आपने मुझ मूर्ख-अभिमानी पर अति कृपा की है।

आपके सहयोग से मैंने अपने बड़प्पन के अहंकार और क्रोध-रूपी शत्रु पर विजय प्राप्त की है।

वह दुबारा घर गया। स्नान करके आश्रम में उपस्थित हुआ।

इस बार महात्मा जी ने उसे गले लगा लिया और बोले- ‘पुत्र! तुमने अपने क्रोध पर काबू पा लिया है अतः अब तुम आश्रम में कार्य करने के सच्चे अधिकारी हो।



5. हर व्यक्ति के जीवन की एक कहानी है - Moral Story in Hindi

एक बार एक 26 साल का लड़का और उसका पिता रेलगाड़ी (Train) में सफ़र कर रहे थे।

वह लड़का बार-बार train की खिड़की से झाँक रहा था और बहार दिखते हुए पेड़ पौधों को देखकर जोर-जोर से चिल्ला रहा था और हंस रहा था ।

पास ही में एक शादी-शुदा जोड़ा बैठे थे वह यह सब देखकर हंस रहे थे।

तभी उस 26 साल के लड़के के पिता ने अपने बेटे से कहा- देखो बेटा… बाहर असमान में बादलों को देखो वह भी हमारे साथ दौड़ लगा रहे हैं।

यह पागलपना देखकर उस शादी-शुदा जोड़े को सहन नहीं हुआ और वह उस लड़के के पिता से बोल बैठे!

शादी-शुदा जोड़े बोले- आप अपने बेटे को किसी डॉक्टर को क्यों नहीं दिखाते?

यह सुनकर उस लड़के के पिता ने उत्तर दिया!- हाँ , हम डॉक्टर के पास से ही आ रहे हैं।

दरसल मेरा बेटा देख नहीं सकता था पर आज उसके आँखों के सफल ऑपरेशन के कारण वह देख पा रहा है और आज वह बहुत खुश है।

इस पुरे पृथ्वी में हर किसी व्यक्ति के जीवन में एक कहानी है।

शिक्षा/Moral:- हमें इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि किसी भी व्यक्ति के विषय में पूरी जानकारी न होने पर उसके विषय में टिपण्णी करना बिलकुल गलत बात है।

आपको ये कहानियाँ कैसी लगी? हमे कमेंट करके जरुर बताये और इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करें.

सुख और दुःख तो सभी के जीवन में आते है लेकिन ये हम पर निर्भर करता है की हम उन्हें कैसे देखते है और उनका हल कैसे ढूंढते है. जीवन में कभी हार नहीं मानने के लिए हमेशा motivated रहने की जरुरत होती है motivated रहने के लिये kahaniya.xyz से जूडे रहे।

धन्यवाद दोस्तों 🥰

6 Jul 2020

July 06, 2020

15+ Best motivational quotes in Hindi ||motivational shayari in hindi

हिंदी कहानियां [Hindi kahaniya]

kahaniya.xyz blog provide you hindi motivational stories,hindi kahaniya,hindi motivational quotes,hindi motivational quotes image,hindi kahaniya for kids ,hindi motivational story for children, short motivational Hindi kahaniya, motivational kahaniya

1. संघर्ष
संघर्ष में आदमी अकेला होता है,
सफलता में दुनिया उसके साथ होती है,
जिस-जिस पर ये जग हँसा है,
उसीने इतिहास रचा है



2. धीरज
पानी को बर्फ में,
बदलने में वक्त लगता है !!
ढले हुए सूरज को,
निकलने में वक्त लगता है !!

थोड़ा धीरज रख,
थोड़ा और जोर लगाता रह !!
किस्मत के जंग लगे दरवाजे को,
खुलने में वक्त लगता है !!



3. रोना नहीं
जो खो गया, उसके लिए रोया नहीं करते
जो पा लिया, उसे खोया नहीं करते
उनके हीं सितारे चमकते हैं, जो मजबूरियों का रोना रोया नहीं करते



4. Takdeer
Takdeer Ke Khel Se Nirash Nahi Hote,
Zindagi Me Kabhi Udaas Nahi Hote,
Hatho Ki Lakhiro Pe Yakeen Mat Karna,
Takdir To Unki B Hoti H Jinke Hath Nhi Hote.



5. समज
क्यों चिंता करते है यदि लोग तुम्हे समज नहीं पाते,
चिंता तो तुम्हे तब करनी चाहिए जब तुम खुद को समज नहीं पाते



6. एहसान-शर्मिंदगी
मांगो तो अपने रब से मांगो , जो दे तो रहमत और न दे तो किस्मत ,
लेकिन दुनिया से हरगिज मत मांगना , क्योंकि दे तो एहसान और न दे तो शर्मिंदगी ..



7. सरफिरे-इतिहास
जो सरफिरे होते है ।।इतिहास वही लिखते है
समजदार लोग तो सिर्फ उनके बारे में पढते हैं।।



8. समय बदलता है
परख अगर हीरे की करनी है तो अंधेँरे का इन्तजार करो......,,,
वरना धुप मे तो काँच के टुकडे भी चमकते है"



9. जिगर (my favourite )
दम कपड़ो में नहीं,जिगर में रखो….
बात अगर कपड़ो में होती तो,सफ़ेद कफ़न में,लिपटा हुआ मुर्दा भी “सुल्तान मिर्ज़ा” होता.



10. मत बन
यह दुनिया इंसानो की बस्ती हैं फरिश्ता मत बन ,
लोग पत्थर से तुझे मारेंगे शीशा मत बन...
ऐसा कुछ कर कि तुझे सारा जमाना देखे,
अपनी पहचान बना, भीड़ का हिस्सा मत बन !


11. Believe in yourself . .

जब मेहनत करने के बाद भी सपने पूरे नहीं होते;
तो रास्ते बदलिए , सिंधांत नहीं ,
क्योंकि पेड़ भी हमेशा पत्ते बदलता हैं जड़ नहीं ।।


12. हुनर
समय के साथ बदलने का हुनर तो हर कोई रखता है जनाब!
मज़ा तो तब आए जब वक्त बदल जाए और इंसान ना बदले ।।

2 Jul 2020

July 02, 2020

आम की गुठलियाँ | Hindi Motivational Stories on Patience | धैर्य व सब्र पर प्रेरणादायक कहानी

हिंदी कहानियां [Hindi kahaniya]

kahaniya.xyz blog provide you hindi motivational stories,hindi kahaniya,hindi motivational quotes,hindi motivational quotes image,hindi kahaniya for kids ,hindi motivational story for children


आम की गुठलियाँ | Hindi Motivational Stories on Patience :- 

अरविन्द के अन्दर धैर्य बिलकुल भी नहीं था. वह एक काम शुरू करता…कुछ दिन उसे करता और फिर उसे बंद कर दूसरा काम शुरू कर देता. इसी तरह कई साल बीत चुके थे और वह अभी तक किसी बिजनेस में सेटल नहीं हो पाया था

अरविन्द की इस आदत से उसके माता-पिता बहुत परेशान थे. वे जब भी उससे कोई काम छोड़ने की वजह पूछते तो वह कोई न कोई कारण बता खुद को सही साबित करने की कोशिश करता.

अब अरविन्द के सुधरने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही थी कि तभी पता चला कि शहर से कुछ दूर एक आश्रम में  बहुत पहुंचे हुए गुरु जी का आगमन हुआ. दूर-दूर से लोग उनका प्रवचन सुनने आने लगे.

एक दिन अरविन्द के माता-पिता भी उसे लेकर महात्मा जी के पास पहुंचे.

उनकी समस्या सुनने के बाद उन्होंने अगले दिन सुबह-सुबह अरविन्द को अपने पास बुलाया.

इस कहानी को भी पढ़ें: तीन गुरु
अरविन्द को ना चाहते हुए भी भोर में ही गुरु जी के पास जाना पड़ा.

गुरु जी उसे एक  बागीचे में ले गए और धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए बोले.

बेटा तुम्हारा पसंदीदा फल कौन सा है.

अरविन्द बोला :- "आम"

ठीक है बेटा !  जरा वहां रखे बोरे में से कुछ आम की गुठलियाँ निकालना और उन्हें यहाँ जमीन में गाड़ देना.

अरविन्द को ये सब बहुत अजीब लग रहा था लेकिन गुरु जी बात मानने के अलावा उसके पास कोई चारा भी नहीं था.

उसने जल्दी से कुछ गुठलियाँ उठायीं और फावड़े से जमीन खोद उसमे गाड़ दीं.

फिर वे अरविन्द को लेकर वापस आश्रम में चले गए.

करीब आधे घंटे बाद वे अरविन्द से बोले, “जरा बाहर जा कर देखना उन  गुठलियों में से फल निकला की नहीं!”



“अरे! इतनी जल्दी फल कहाँ से निकल आएगा… अभी कुछ ही देर पहले तो हमने गुठलियाँ जमीन में गाड़ी थीं.”

“अच्छा, तो रुक जाओ थोड़ी देर बाद जा कर देख लेना!”

कुछ देर बाद उन्होंने अरविन्द से फिर बाहर जा कर देखने को कहा.

अरविन्द जानता था कि अभी कुछ भी नहीं हुआ होगा, पर फिर भी गुरु जी के कहने पर वह बागीचे में गया.



लौट कर बोला, “कुछ भी तो नहीं हुआ है गुरूजी…आप फल की बात कर रहे हैं अभी तो बीज से पौधा भी नहीं निकला है.”

“लगता है कुछ गड़बड़ है!”, गुरु जी ने आश्चर्य से कहा.

“अच्छा, बेटा ऐसा करो, उन गुठलियों को वहां से निकाल के कहीं और गाड़ दो…”

अरविन्द को गुस्सा तो बहुत आया लेकिन वह दांत पीस कर रह गया.

कुछ देर बाद गुरु जी फिर बोले, “अरविन्द बेटा, जरा बाहर जाकर देखो…इस बार ज़रूर फल निकल गए होंगे.”

अरविन्द इस बार भी वही जवाब लेकर लौटा और बोला, “मुझे पता था इस बार भी कुछ नहीं होगा…. कुछ फल-वाल नहीं निकला…”

“….क्या अब मैं अपने घर जा सकता हूँ?”

“नहीं, नहीं रुको…चलो हम इस बार गुठलियों को ही बदल कर देखते हैं…क्या पता फल निकल आएं.”

इस बार अरविन्द ने अपना धैर्य खो दिया और बोला, “मुझे यकीन नहीं होता कि आपके जैसे नामी गुरु को इतनी छोटी सी बात पता नहीं कि कोई भी बीज लगाने के बाद उससे फल निकलने में समय लगता है….आपको  बीज को खाद-पानी देना पड़ता है ….लम्बा इन्तजार करना पड़ता है…तब कहीं जाकर फल प्राप्त होता है.”

गुरु जी मुस्कुराए और बोले-

बेटा, यही तो मैं तुम्हे समझाना चाहता था…तुम कोई काम शुरू करते हो…कुछ दिन मेहनत करते हो …फिर सोचते हो प्रॉफिट क्यों नहीं आ रहा!  इसके बाद तुम किसी और जगह वही या कोई नया काम शुरू करते हो…इस बार भी तुम्हे रिजल्ट नहीं मिलता…फिर तुम सोचते हो कि “यार! ये धंधा ही बेकार है!

एक बात समझ लो जैसे आम की गुठलियाँ तुरंत फल नहीं दे सकतीं, वैसे ही कोई भी कार्य तब तक अपेक्षित फल नहीं दे सकता जब तक तुम उसे पर्याप्त प्रयत्न और समय नहीं देते.  

इसलिए इस बार अधीर हो आकर कोई काम बंद करने से पहले आम की इन गुठलियों के बारे में सोच लेना …. कहीं ऐसा तो नहीं कि तुमने उसे पर्याप्त समय ही नहीं दिया!



अरविन्द अब अपनी गलती समझ चुका था. उसने मेहनत और धैर्य के बल पर जल्द ही एक नया व्यवसाय खड़ा किया और एक कामयाब व्यक्ति बना.





29 Jun 2020

June 29, 2020

Motivational stories in hindi for collage students -ज़िन्दगी की सब से बड़ी समस्या

In this article you will get the hindi kahaniya (हिंदी कहानियां) ,motivation stories in hindi ,some famous Hindi stories, Indian famous Hindi stories, motivational kahaniya



ज़िन्दगी की सब से बड़ी समस्या
हमारी जिंदगी में हमेशा एक ऐसा समय आता है जहां  हम अपने आप को हरा हुए समझते है हमें छोटी से छोटी समस्या भी बहुत बड़ी लगती है यह कहानी एक 22 साल के लड़के की कहानी है जिसे जीवन में बहुत सारी परेशानियों के बाजूद काफी खुश रहने वाली की है।
एक दिन की बात है लड़का कॉलेज में अपने दोस्तो के सात मस्ती कर रहा था उसमे से एक लड़की बोली

Also read ;-  “चपरासी की नौकरी” Motivational Story in Hindi for college students  and school Students


लड़की :- यार मिकेश तुझे आज तक मैंने एक बार भी परेशान होते हुए नहीं देखा
उतने में दूसरे लड़के देे बोला
लड़का २ :- हा यार तू कभी tension नहीं लेता हमेशा खुश रहता है
मिकेश :- यार बात बस इतनी सी है जब भी लाइफ में मेरे को किसी भी बात की टेंशन होती है मै अपने दिल की धड़कन सुनता हूं  धड़कन सुन के अहसास होता है कि जिंदगी अभी बाकी है जिस दिन मेरी धड़कन रुक जाएगी वह मेरी जिंदगी की सब से बड़ी समस्या होगी क्योंकि इस समस्या को में हल नहीं कर सकता ।इस जिंदगी में हर समस्या का समाधान है पर मौत का नहीं मौत तो सब की तैय है तो लाइफ को full enjoy कर के जीना चाहिए क्योंकि कल किसी ने नहीं देखा।

दोस्तों हर किसी के लाइफ में प्रॉब्लम होती है हर किसी कि जिंदगी में समस्याएं आती है समस्या का समाधान हमारे आस पास होता है टेंशन में आ के लाइफ को काटो नहीं लाइफ को जीयो ,जिस तरह की तुम लाइफ जी रहे हो वो लाखो लोगों का सपना होती है ।  


Also read ;- 15+ Best motivational quotes in Hindi ||motivational shayari in hindi

पानी को बर्फ में,
बदलने में वक्त लगता है !!
ढले हुए सूरज को,
निकलने में वक्त लगता है !!
थोड़ा धीरज रख,
थोड़ा और जोर लगाता रह !!
किस्मत के जंग लगे दरवाजे को,
खुलने में वक्त लगता है !!

23 Jun 2020

June 23, 2020

Non veg jokes in Hindi | latest नॉन वेज जोक्स

Hear you get non veg jokes in hindi ,non veg jokes Hindi and some awesome non veg image jokes

Hear are some awesome non veg jokes

"एक लड़का अपने जिगरी दोस्त से पूछता है ...........?
यार 😜😜अच्छी और बुरी गर्लफ्रेंड में क्या फर्क है ...??
लड़का कहता है.........😜😜 
दोस्त याद रखो जो अच्छी होगी वह खुशी देगी और जो बहुत बुरी होगी वह  खुशी खुशी देगी"


"Ek ladka apane jigari dost se puchta h 
yaar 🤔achhi girlfriend aur buri girlfriend me kya fark hota hai...??
Ladka kahta h ..😅
Dost yad rakh jo achhi hogi vo khushi degi aur jo bhut bhuri hogi vo khushi khushi degi" ...😂😂


एक लड़की को अंग्रेजी बोलने का बड़ा शौक था 😜😜
लड़की को सुहागरात के दिन पता चला कि उसके पति का एक पैर नहीं है?
वह घर आकर अपनी मां से बोली मां-मां मेरे पति 😀 का सिर्फ 1 फुट है ? 
मां हैरान होकर बोली😲
हे भगवान बेटी और तुझे कितना 😜 बड़ा चाहिए"

Ek ldki ko English bolne ka bada shok tha 😜😜
Ldki ko suhagrat ke din pta chala ki uske pati ka ek pair nhi h 🙄
Vha ghar aakar apani ma se boli ma -ma mere pati 😄sirf 1 foot hai 😅😅😅
Ma hairan ho k boli 😲😲
Hye bhagwan !! Beti aur kitna😜😜 bada Chahiye

Non veg jokes on girl friend

गर्लफ्रेंड- अब हम बहुत ज्यादा बदनाम हो गए हैं,
अब हमें शादी कर लेनी चाहिए
बॉयफ्रेंड- लेकिन ये तो बता इतनी बदनामी के
बाद हमसे शादी करेगा कौन?

Girlfriend- ab hum bhut jada badnam ho gaye hai🙄🙄
Ab hame sadi kr leni chahiye🙄🙄
Boyfriend- lekin ye bta itni badnami ke bad hamse sadi kerga kon😂😂


एक लड़की छाता ठीक करवाने गयी।
दुकानदार: ऊपर का कपड़ा उतारना पड़ेगा और नीचे डण्डा डालना पड़ेगा।
लड़की: जो मर्ज़ी करो बस पानी अंदर नहीं गिरना चाहिए

Ek ldki chhata thi karwane gai!!😜😜
Shopkeeper - upper ka kadha utarna padega aur niche danda dalna padega🙄🙄
Ldki- jo marji kro 🙄bs pani nhi girna chahiye 😂😂😂

गर्लफ्रेंड: तुमने मुझ में ऐसा क्या दे🙄 मुझे प्रपोज कर दिया?😎😎         
  पप्पू: सब कुछ देखने🙄 के लिए ही तो प्रोपोज़ किया है, पगली!😅😅😅

Girl friend:-tumne mujh me aisa kya🙄 dekh ki prapose kr Diya😎😎
Papi:- sab Kuch dekhne ke😅iye hi to prapose Kiya hai😂😂😂


एक लड़की अपनी सहेली को बता रही थी...
कल रात मेरे ब्वॉयफ्रेंड ने अंधेरे में डालने की कोशिश की...
मैंने मना भी किया कि रहने दे अंधेरा है, लाइट जला ले...
पर वो नहीं माना और आखिर जोर लगा के तुड़वा ही बैठा...
क्योंकि सुराख़ गलत था...
अंधेरे में मोबाइल में चार्जर का पिन लगाना बड़ा ही मुश्किल काम है...

Ek ldki apni saheli ko bata rahi thi...
Kl rat mere boyfriend ne andhere me dalne ki koshish ki,🙄🙄🙄
Maine mana bhi kiya🤗🤗ki rhne de andhera hai lite jala le ..🥰🥰
Per vo nhi mana 🥺🥺aur aakhiri jor laga ke tudhwa hi baitha
Kyonki shurakh galt tha...😅😅
Andhere me mobile me charger ka pin lagana bda hi mushkil kam hai🤔🤔🤔


Girl frnd : बेबी, कल मैं तुम्हारे लिए fast करूंगी…
Boy frnd : ना बेबी आराम से करेंगे, मज़े ले लेके धीरे धीरे फील के साथ
She: हवस के कुत्ते मैं व्रत की बात कर रही!

Gf:- baby !! Kl mai tumhare liye fast karungi....😍😍😍😊
Bf:- no baby!! Aaram se karenge ,maje le leke dhire dh🥰🥰eel ke sath
Gf :- hawash ke kute mai vrat ki bat kar rahi thi😂😂



21 Jun 2020

June 21, 2020

pauranik rahasyamayi kahaniya- Reincarnation:- एक रहस्यमय पौराणिक कथा

हिंदी कहानियां [Hindi kahaniya]

kahaniya.xyz blog provide you hindi motivational stories,hindi kahaniya,hindi motivational quotes,hindi motivational quotes image,hindi kahaniya for kids ,hindi motivational story for children, short motivational Hindi kahaniya



मैंने अपने इस ब्लॉग में आपको कुछ समय पहले पुर्नजन्म से जुड़ी हुई कुछ घटनाओं के बारे में बताया था। लेकिन आज मैं आपको जो बताने जा रहा हूँ वो एक हिन्दू पौराणिक कथा है यह गाथा जिन पात्रों के इर्द-गिर्द घूमती है जाहिर तौर पर आप उनके किसी न किसी जन्म के बारे में जानते होंगे। आखिर कौन है वो पात्र? और क्यों उन्होंने बार-बार इस दुनियां में जन्म लिया क्या कारण था इसके पीछे आईये जानते है।



हमारे पुराणों शास्त्रों में न जाने कितनी कथा-कहानियां मौजूद है जिससे बहुत कम लोग परिचित हैं। आज मैं आपको जिस कथा से रूबरू करवा रहा हूँ उसे जानकर आप जाहिर तौर पर हैरत में पड़  जायेंगे। हो सकता है आप में से कई लोगों इस कथा से परिचित हो, या कुछ ऐसे भी होगें जिन्हें इस कथा का ज्ञान नहीं होगा। यदि हम अपने पौराणिक कथा कहानियों को खंगाले तो न जाने कितने हैरान करने वाले किस्से कहानियां हमारे सामने आएंगी। तो हो जाईये मेरे साथ इस सफ़र के लिए तैयार आज मैं आपको जिन पात्रों के बारे में बताने जा रहा हूँ उनका नाम है जय और विजय।





हम कथा की शुरूआत करते है भगवान विष्णु के वैकुण्ठ लोक से जहां जय और विजय नामक दो भाई वैकुण्ठ लोक के द्वार पाल थे। एक बार जब यह दोनों पहरा दे रहे थे तो इन्होंने देखा की कुछ ऋषि कुमार वैकुण्ठ लोक की ओर चले आ रहे है। करीब आने के बाद ऋषि कुमारों ने जय-विजय से भगवान विष्णु मिलने की इच्छा जताई यह ऋषि कुमार कोई ओर नहीं बल्कि सनक, सनन्दन, सनातन और सनत्कुमार थे, यह चारों सनकादिक ऋषि भी कहलाते है इन्हें देवताओं का पूर्वज माना जाता है। जय और विजय ने इन ऋषियों को द्वार पर ही रोक लिया और वैकुण्ठ लोक के भीतर जाने से मना करने लगे। जय और विजय के इस प्रकार व्यवहार करने से यह चारों ऋषि काफी क्रोधित हुए और उन्होंने गुस्से में आकर कहा हम भगवान विष्णु के परम भक्त है और तुम दोनों हमें उनके दर्शन करने से रोक रहे हो। क्या तुम हमें नहीं जानते हो? तुम दोनों वैकुण्ठ लोक के पहरेदार होकर भी अहंकार से चूर हो चुके हो इसी कारण तुमने यह दु:साहस किया और हमें प्रभु के दर्शन करने से रोका तुम दोनों ने जो पाप किया है इसकी सज़ा यही है कि तुम दोनों पाप योनि में जाओ और अपने पाप का फल भुगतो। सनकादिक ऋषि के शाप से दोनों इतने डर गए कि उन्होंने तुरंत ही ऋषियों के चरण पकड़ लिए और क्षमा याचना करने लगे।





जब भगवान विष्णु के इस बारे में पता चला तो वह अपनी पत्नी लक्ष्मी के साथ स्वयं द्वारा पर आए और कहा "हे ऋषिवरों! ये जय और विजय मेरे पार्षद हैं। इन दोनों ने अहंकार वश आपका अपमान करके अपराध किया है। इन्होंने आपकी अवज्ञा नहीं बल्कि स्वयं मेरी अवज्ञा की है और इसकी सजा इनको मिलनी ही चाहिए थी आप लोगों ने इन दोनों अहंकारियों की शाप देकर बहुत अच्छा कार्य किया है। भगवान विष्णु के इन विनम्र वाणी को सुनकर ऋषि कुमारों को बेहद दुख हुआ और उन्होंने दोनों को अपने शाप से मुक्त करने की बात कहीं लेकिन भगवान विष्णु ने कहा, "हे मुनिवरों! मैं ब्राह्मणों के वचन को असत्य नहीं करना चाहता क्योंकि इससे धर्म का उल्लंघन होता है। आपने जो इन दोनों को शाप दिया है यह मेरी ही लीला थी। ये दोनों अवश्य ही इस दण्ड के भागी हैं। यह दैत्य योनि को प्राप्त करेंगे और मेरे द्वारा इनका संहार होगा। इसके बाद ये पुनः इस धाम में वापस आ जायेंगे।





जिस कारण जय को हिरण्याक्ष, रावण और अंत में शिशुपाल का अवतार लेना पड़ा। वही विजय को हिरण्यकशिपु, कुंभकर्ण और कंस के रूप में जन्म लेना पड़ा। हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु दोनों दक्ष प्रजापति की पुत्री दिति और कश्यप की संतान थे इन्हें मारने के लिए भगवान विष्णु ने वाराहावतार लिया था।



रावण और कुंभकर्ण कैकसी और मुनि विश्रवा के पुत्र थे इनका वध करने के लिए भगवान विष्णु ने राम के रूप में जन्म लिया।





शिशुपाल और कंस का वध करने के लिए भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में जन्म लिया था। शिशुपाल दमघोष का पुत्र और श्री कृष्ण का मौसेरा भाई था जिसके 100 अपराध क्षमा करने के बाद श्रीकृष्ण ने उसका वध कर दिया था। इसी प्रकार कंस जो उग्रसेन के पुत्र थे और रिश्ते में कृष्ण के मामा लगते है इनका वध भी भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण के हाथों हुआ था।



इस प्रकार जय और विजय ने अपने तीनों जन्म पूरे कर लिए और हर जन्म में उन्हें उनके शाप से मुक्त कराने के लिए स्वयं भगवान विष्णु को आना पड़ा इस प्रकार दोनों भाईयों को सनकादिक ऋषि के शाप से मुक्ति मिली और वह पुन: वैकुण्ठ लोक में चले गए और भगवान विष्णु की सेवा में लग गए।



ऐसी ही न जाने कितने किस्से व कहानियाँ मौजूद है जिनमें किसी न किसी किरदार ने, ना जाने कितने जन्म लिए और फिर इस दुनियां से अलविदा हो गया। हो सकता है आप भी उनमें से एक हो? तो अगली बार जब भी आप अपने बारे में गंभीरता से सोचे तो यह जरूर जान लीजियेगा कि आपका यह जन्म पहला नहीं है। इससे पहले भी आप कई और जन्म ले चुके है फर्क सिर्फ इतना है आपको इसका ज्ञान नहीं है कि आप किस जन्म में क्या थे।
June 21, 2020

Hindi kahaniya- 5 Motivational stories in hindi for college students


हिंदी कहानियां [Hindi kahaniya]

kahaniya.xyz blog provide you hindi motivational stories,hindi kahaniya,hindi motivational quotes,hindi motivational quotes image,hindi kahaniya for kids ,hindi motivational story for children, short motivational Hindi kahaniya

Hear are some Motivational Stories in Hindi  
1.BumblebeeStory – भौंरा
दोस्तों वैज्ञानिकों के अनुसार भौंरे का शरीर बहुत भारी होता है| इसलिए विज्ञान के नियमो के अनुसार वह उड़ नहीं सकता| लेकिन भौंरे को इस बात का पता नहीं होता एंव वह यह मानता है की वह उड़ सकता है| इसलिए वह लगातार कोशिश करता जाता है और बार-बार असफल होने पर भी वह हार नहीं मानता क्योंकि वह यही सोचता है कि वह उड़ सकता है| आखिरकार भौंरा उड़ने में सफल हो ही जाता है




2.Double Century Cricket Story – क्रिकेट
इसी तरह क्रिकेट की बात ले लीजिये – वनडे क्रिकेट के इतने बड़े इतिहास में वर्ष 2010 तक एक भी दोहरा शतक नहीं लगा लेकिन वर्ष 2010 में सचिन तेंदुलकर के दोहरा शतक लगाने के 4-5 वर्षों में ही 7 और दोहरे शतक (Double Centuries) लग गए| क्या यह मात्र संयोग था? ऐसा क्यों हुआ?

ऐसा इसीलिए हुआ क्योंकि 2010 से पहले जब किसी ने दोहरा शतक नहीं लगाया था तो सभी की मानसिकता यही थी कि दोहरा शतक लगाना बहुत ही मुश्किल है| क्योंकि अभी तक इस रिकॉर्ड को किसी ने नहीं तोडा था तो यह नामुनकिन सा लगता था| लेकिन जब सचिन ने दोहरा शतक लगाया तो सभी की मानसिकता बदल गयी और यह लगने लगा कि दोहरा शतक लगाना मुश्किल है पर नामुनकिन नहीं|

3. 
June 21, 2020

Hindi kahaniya Motivational hindi kahaniya for students -हाथी – Elephant Rope Story

हिंदी कहानियां [Hindi kahaniya]

kahaniya.xyz blog provide you hindi motivational stories,hindi kahaniya,hindi motivational quotes,hindi motivational quotes image,hindi kahaniya for kids ,hindi motivational story for children, short motivational Hindi kahaniya


हाथी – Elephant Rope Story
क्या आपको पता है, जब हाथी का बच्चा छोटा होता है तो उसे पतली एंव कमजोर रस्सी से बांधा जाता है| हाथी का बच्चा छोटा एंव कमजोर होने के कारण उस रस्सी को तोड़कर भाग नहीं सकता| लेकिन जब वही हाथी का बच्चा बड़ा और शक्तिशाली हो जाता है तो भी उसे पतली एंव कमजोर रस्सी से ही बाँधा जाता है, जिसे वह आसानी से तोड़ सकता है लेकिन वह उस रस्सी को तोड़ता नहीं है और बंधा रहता है| ऐसा क्यों होता है?
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जब हाथी का बच्चा छोटा होता है तो वह बार-बार रस्सी को छुड़ाकर भागने की कोशिश करता है, लेकिन वह कमजोर होने के कारण उस पतली रस्सी को तोड़ नहीं सकता और आखिरकर यह मान लेता है कि वह कभी भी उस रस्सी को तोड़ नहीं सकता| हाथी का बच्चा बड़ा हो जाने पर भी यही समझता है कि वह उस रस्सी को तोड़ नहीं सकता और वह कोशिश ही नहीं करता| इस प्रकार वह अपनी गलत मान्यता अथवा गलत धारणा (Wrong Beliefs) के कारण एक छोटी सी रस्सी से बंधा रहता है जबकि वह दुनिया के सबसे ताकतवर जानवरों में से एक है




20 Jun 2020

June 20, 2020

Hindi kahaniya Motivational story for students||बोले हुए शब्द वापस नहीं आते


हिंदी कहानियां [Hindi kahaniya]
kahaniya.xyz blog provide you hindi motivational stories,hindi kahaniya,hindi motivational quotes,hindi motivational quotes image,hindi kahaniya for kids ,hindi motivational story for children, short motivational Hindi kahaniya



एक बार एक किसान ने अपने पडोसी को भला बुरा कह दिया, पर जब बाद में उसे अपनी गलती का एहसास हुआ तो वह एक संत के पास गया.उसने संत से अपने शब्द वापस लेने का उपाय पूछा.

संत ने किसान से कहा , ” तुम खूब सारे पंख इकठ्ठा कर लो , और उन्हें शहर  के बीचो-बीच जाकर रख दो .” किसान ने ऐसा ही किया और फिर संत के पास पहुंच गया

तब संत ने कहा , ” अब जाओ और उन पंखों को इकठ्ठा कर के वापस ले आओ”

किसान वापस गया पर तब  तक सारे पंख हवा से इधर-उधर उड़ चुके थे. और किसान खाली हाथ संत के पास पहुंचा. तब संत ने उससे कहा कि ठीक ऐसा ही तुम्हारे द्वारा कहे गए शब्दों के साथ होता है,तुम आसानी से इन्हें अपने मुख से निकाल तो सकते हो पर चाह कर भी वापस नहीं ले सकते.

इस कहानी से क्या सीख मिलती है:

कुछ कड़वा बोलने से पहले ये याद रखें कि भला-बुरा कहने के बाद कुछ भी कर के अपने शब्द वापस नहीं लिए जा सकते. हाँ, आप उस व्यक्ति से जाकर क्षमा ज़रूर मांग सकते हैं, और मांगनी भी चाहिए, पर human nature कुछ ऐसा होता है की कुछ भी कर लीजिये इंसान कहीं ना कहीं hurt हो ही जाता है.जब आप किसी को बुरा कहते हैं तो वह उसे कष्ट पहुंचाने के लिए होता है पर बाद में वो आप ही को अधिक कष्ट देता है. खुद को कष्ट देने से क्या लाभ, इससे अच्छा तो है की चुप रहा जाए.



June 20, 2020

Hindi kahaniya - सबसे कीमती चीज||motivational stories for students in hindi

हिंदी कहानियां [Hindi kahaniya]
kahaniya.xyz blog provide you hindi motivational stories,hindi kahaniya,hindi motivational quotes,hindi motivational quotes image,hindi kahaniya for kids ,hindi motivational story for children, short motivational Hindi kahaniya



इस आर्टिकल में आपको एक motivational speaker द्वारा एक एग्जाम्पल लिए गया है

एक जाने-माने स्पीकर ने हाथ में पांच सौ का नोट लहराते हुए अपनी सेमीनार शुरू की. हाल में बैठे सैकड़ों लोगों से उसने पूछा ,” ये पांच सौ का नोट कौन लेना चाहता है?” हाथ उठना शुरू हो गए.

फिर उसने कहा ,” मैं इस नोट को आपमें से किसी एक को दूंगा पर  उससे पहले मुझे ये कर लेने दीजिये .” और उसने नोट को अपनी मुट्ठी में चिमोड़ना शुरू कर दिया. और  फिर उसने पूछा,” कौन है जो अब भी यह नोट लेना चाहता है?” अभी भी लोगों के हाथ उठने शुरू हो गए.
"अच्छा” उसने कहा,” अगर मैं ये कर दूं ? ” और उसने नोट को नीचे गिराकर पैरों से कुचलना शुरू कर दिया. उसने नोट उठाई , वह बिल्कुल चिमुड़ी और गन्दी हो गयी थी.
 क्या अभी भी कोई है जो इसे लेना चाहता है?”. और एक  बार  फिर हाथ उठने शुरू हो गए.
” दोस्तों  , आप लोगों ने आज एक बहुत महत्त्वपूर्ण पाठ सीखा है. मैंने इस नोट के साथ इतना कुछ किया पर फिर भी आप इसे लेना चाहते थे क्योंकि ये सब होने के बावजूद नोट की कीमत घटी नहीं,उसका मूल्य अभी भी 500 था.



जीवन में कई बार हम गिरते हैं, हारते हैं, हमारे लिए हुए निर्णय हमें मिटटी में मिला देते हैं. हमें ऐसा लगने लगता है कि हमारी कोई कीमत नहीं है. लेकिन आपके साथ चाहे जो हुआ हो या भविष्य में जो हो जाए , आपका मूल्य कम नहीं होता. आप स्पेशल हैं, इस बात को कभी मत भूलिए.कभी भी बीते हुए कल की निराशा को आने वाले कल के सपनो को बर्बाद मत करने दीजिये. याद रखिये आपके पास जो सबसे कीमती चीज है, वो है आपका जीवन.”